राजनीतिक – My Blog https://news.newspaperhost.com My WordPress Blog Wed, 01 Jul 2026 14:20:37 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 मोदी कैबिनेट विस्तार में यूपी से पंजाब तक का दबदबा! क्या बागियों को भी मिलेगा मौका? https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:37 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/ मोदी-कैबिनेट-विस्तार-में-यूपी-से-पंजाब-तक-का-दबदबा!-क्या-बागियों-को-भी-मिलेगा-मौका?

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कई बदलावों की तैयारी चल रही है. माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. कैबिनेट विस्तार में कई नए मंत्रियों का नाम जुड़ सकते हैं तो कुछ पुराने मंत्रियों की […]]]>
मोदी-कैबिनेट-विस्तार-में-यूपी-से-पंजाब-तक-का-दबदबा!-क्या-बागियों-को-भी-मिलेगा-मौका?

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगुवाई वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कई बदलावों की तैयारी चल रही है. माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. कैबिनेट विस्तार में कई नए मंत्रियों का नाम जुड़ सकते हैं तो कुछ पुराने मंत्रियों की मंत्रिमंडल से छुट्टी हो सकती है। 

मोदी कैबिनेट के विस्तार का रोडमैप तैयार किया जा रहा है. मंत्रिमंडल विस्तार का फोकस उन राज्यों पर रहेगा, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इसके चलते माना जा रहा है कि मोदी मंत्रिमंडल में उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब, उत्तराखंड जैसे राज्यों से प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख से लेकर मंत्रिमंडल के चेहरों तक पर कयास लगाए किए जा रहे हैं. 11 जुलाई तक पीएम मोदी का कई कार्यक्रम और दौरे लगे हुए हैं. संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरु हो सकता है. ऐसे में मॉनसून सत्र से पहले मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है? 

मोदी कैबिनेट विस्तार से समीकरण साधने का दांव
देश की सियासत में सबसे ज्यादा चर्चा मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर हो रही है. बीजेपी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाए. साथ ही क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। 

मोदी कैबिनेट में शामिल मंत्रियों में पंकज चौधरी उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा दिल्ली के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बन गए हैं. ऐसे में प्रबल संभावना है कि  बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करते हुए दोनों ही मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है. इसके अलावा जॉर्ज कुरियन केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं तो केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो गया है। 

रवनीत बिट्टू भी देर-सबेर मंत्री पद छोड़ सकते हैं. इन चार जगह पर नए मंत्री बनाए जा सकते हैं तो 9 मंत्री पद पहले से ही खाली हैं. मोदी के अगुवाई सरकार में फिलहाल 72 मंत्री हैं, जिसमें 31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री. केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बन सकते हैं. इस लिहाज से 13 मंत्री पद की साफ जगह बन रही है. इसके अलावा कुछ मंत्रियों को कैबिनेट से हटाया भी जा सकता है तो कुछ नए मंत्रियों को एंट्री मिल सकती है। 

मंत्रिमंडल विस्तार में चुनावी राज्यों पर होगा फोकस
मोदी कैबिनेट विस्तार में बीजेपी का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रह सकता है, जहां पर विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तर प्रदेश,उत्तराखंड और पंजाब सहित सात राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में साल के शुरू में ही चुनाव हैं तो हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के आखिर में चुनाव होने हैं। 

विधानसभा चुनाव को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में चुनावी राज्यों सेप्रतिनिधित्व बढ़ाया जा सकता है ताकि सियासी समीकरणों को चुनाव के लिहाज से साधा जा सके. इसलिए इन राज्यों के कुछ नेताओं को मोदी कैबिनेट में जगह मिल सकती है. उत्तराखंड की बात करें तो अजय टम्टा मोदी कैबिनेट में परिवहन राज्य मंत्री हैं. टम्टा मोदी कैबिनेट में दूसरी बार राज्यमंत्री हैं और वे बीजेपी के दलित चेहरे हैं. ऐसे में नई टीम में उनका कद बढ़ाया जा सकता है या फिर एक और चेहरे को शामिल किया जा सकता है। 

उत्तर प्रदेश से लेकर पंजाब तक का दिखेगा दबदबा
यूपी से फिलहाल केंद्र सरकार में 10 मंत्री हैं, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं. अब यूपी चुनाव 2027 का रण साधने और राजनीतिक समीकरणों को जमीन पर उतारने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के जरिए बदलाव किया सकता है. 2024 में भले ही भाजपा का प्रदर्शन सूबे में खराब रहा हो, लेकिन केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की भूमिका कम नहीं हुई. विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य की भूमिका को बढ़ाया जा सकता है। 

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए पश्चिमी यूपी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा स्थान मिल सकता है. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक पश्चिमी यूपी पर फोकस करते दिखे हैं. इसके अलावा सूबे के जातीय समीकरण को साधने के लिए ओबीसी व दलित समुदाय से कुछ नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। 

पंजाब में विधानसभा चुनाव है, जिसे देखते हुए मोदी मंत्रिमंडल में पंजाब का प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. मोदी कैबिनेट में रवनीत सिंह बिट्टू एकलौते मंत्री हैं, जो पंजाब से हैं. रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते हैं. लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले वे कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे,लुधियाना सीट से लोकसभा का चुनाव हार गए थे, लेकिन फिर भी पीएम मोदी ने उन्हें अपने कैबिनेट में जगह दी थी। 

सिख समाज से आने वाले केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी यूपी कोटे से मंत्री हैं, लेकिन उन्हें पंजाब में सिख वोटों को साधे रखने के लिए कैबिनेट में जगह दे रखी है. माना जा रहा है कि पंजाब से दो से तीन मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आने वाले राज्यसभा सदस्यों में से किसी चेहरे को मौका मिल सकता है. बीजेपी का पूराव फोकस पंजाब में सरकार बनाने की है, जिसके लिए अभी से भी पार्टी जुट गई है। 

क्या बागी सांसदों को भी कैबिनेट में मिलेगी जगह?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की मिली भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है. तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग होकर एनसीपीआई में विलय किया है और मोदी सरकार को समर्थन करने का ऐलान किया है. ऐसे में सभी की निगाहें लगी हुई हैं कि टीएमसी के किसी बागी सांसद को मोदी सरकार में क्या मंत्री बनाए जा सकता है? 

महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) को 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ आ गए हैं. इस तरह शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में सांसदों की संख्या महाराष्ट्र के एनडीए में सबसे ज्यादा हो गई है. इसके चलते माना जा रहा है कि शिंदे कोटे से कैबिनेट में एक-दो चेहरे बढ़ सकते हैं. अभी शिवसेना से सिर्फ एक ही मंत्री केंद्र में है। 

मोदी कैबिनेट के विस्तार और फेरबदल में बिहार से मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है.  बिहार की राजनीति में हुए बड़े घटनाक्रमों ने इस संभावना को और मजबूत कर दिया है. बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है. नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सम्राट चौधरी सीएम बने हैं. ऐसे में नीतीश कुमार के राज्यसभा चुने जाने के बाद से कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या उन्हें कैबिनेट में एंट्री मिलेगी। 

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उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, आदित्य ठाकरे के करीबी सचिन अहीर ने भी छोड़ा साथ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%b5-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%9d%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%b5-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%9d%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:36 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%89%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%b5-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%9d%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%86/ उद्धव-ठाकरे-को-बड़ा-झटका,-आदित्य-ठाकरे-के-करीबी-सचिन-अहीर-ने-भी-छोड़ा-साथ

मुंबई  लोकसभा के छह सांसदों के साथ छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और गहरा जख्म मिला है. आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेता सचिन अहीर ने भी बगावत कर दी है. अहीर अब एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को उन्होंने विधान परिषद उपसभापति पद के लिए महायुति […]]]>
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मुंबई
 लोकसभा के छह सांसदों के साथ छोड़ने के बाद उद्धव ठाकरे को एक और गहरा जख्म मिला है. आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद और करीबी नेता सचिन अहीर ने भी बगावत कर दी है. अहीर अब एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं. मंगलवार को उन्होंने विधान परिषद उपसभापति पद के लिए महायुति के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया. यह चुनाव बुधवार को होना है. सचिन अहीर ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में पर्चा भरा. इस मौके पर डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार भी मौजूद थीं. वर्ली में आदित्य ठाकरे का राजनीतिक आधार मजबूत करने में अहीर का बड़ा रोल रहा है. ऐसे में उनका जाना ठाकरे परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है. सचिन अहीर साल 2019 में एनसीपी छोड़कर शिवसेना में आए थे. उन्हें 2022 में एमएलसी बनाया गया था। 

बीजेपी नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस टूट के लिए उद्धव ठाकरे और संजय राउत के अहंकार को जिम्मेदार ठहराया है. बावनकुले ने साफ कहा कि बीजेपी का अहीर के इस कदम से कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि ठाकरे गुट अपने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं देता. यही वजह है कि पार्टी में भारी नाराजगी है और नेता लगातार साथ छोड़ रहे हैं। 

शिवसेना के दोनों गुटों में यह सियासी जंग काफी तेज हो गई है. कुछ ही दिन पहले पार्टी के छह सांसदों ने भी शिंदे गुट जॉइन किया था. पार्टी के नेता इसे ‘ऑपरेशन टाइगर’ का नाम दे रहे हैं. विधान परिषद चुनाव से पहले यह बगावत महाविकास अघाड़ी के लिए खतरे की घंटी है। 

शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने क्या दावा किया?
इस बड़े सियासी फेरबदल पर एनसीपी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने कहा, ‘सचिन अहीर पहले हमारी पार्टी में थे. फिर वह उद्धव ठाकरे के साथ गए और अब शिंदे गुट में चले गए.’ उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए काफी खतरनाक बताया. रोहित ने आरोप लगाया कि पैसे और सत्ता के दम पर नेताओं को खरीदा जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि शिंदे गुट अब उनकी पार्टी को भी निशाना बना सकता है। 

हालांकि उन्होंने दावा किया कि शिंदे गुट को अब वैसी सफलता नहीं मिलेगी. वहीं ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने एक अहम जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस चुनाव में जगन्नाथ अभ्यंकर महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार हैं। 

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रतलाम से पैदल भोपाल पहुंचे दो कांग्रेस कार्यकर्ता, निष्कासन के विरोध में PCC कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9a/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9a/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:35 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%9a/ रतलाम-से-पैदल-भोपाल-पहुंचे-दो-कांग्रेस-कार्यकर्ता,-निष्कासन-के-विरोध-में-pcc-कार्यालय-के-बाहर-धरने-पर-बैठे

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस में इस समय ऊपर से नीचे तक सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश के जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा नवीन जिला कार्यकारिणी पर सवाल खड़े करने का सिलसिला जारी हैं। अब कार्यकर्ताओं को सवाल खड़े करने पर उसका खामयाजा भी भुगतना पड़ रहा है।  रतलाम के कांग्रेस कार्यकर्ता […]]]>
रतलाम-से-पैदल-भोपाल-पहुंचे-दो-कांग्रेस-कार्यकर्ता,-निष्कासन-के-विरोध-में-pcc-कार्यालय-के-बाहर-धरने-पर-बैठे

भोपाल 

मध्य प्रदेश कांग्रेस में इस समय ऊपर से नीचे तक सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। प्रदेश के जिलों में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा नवीन जिला कार्यकारिणी पर सवाल खड़े करने का सिलसिला जारी हैं। अब कार्यकर्ताओं को सवाल खड़े करने पर उसका खामयाजा भी भुगतना पड़ रहा है। 

रतलाम के कांग्रेस कार्यकर्ता गौरव पोरवाल और संजय रावत को 6 साल के लिए जिला कांग्रेस कमेटी ने निष्कासित किया है, उससे नाराज होकर उन्होंने न्याय के लिए रतलाम से भोपाल तक पैदल पद यात्रा की और सोमवार सुबह से ही वह दरी बिछाकर कांग्रेस कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। हालांकि इस दौरान पीसीसी कार्यालय में आयोजित बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पहुंचे थे, उन्होंने कार्यकर्ताओं को देखा भी लेकिन उनसे मुलाकात करना जरूरी नहीं समझा और चलो चलो कहते हुए आगे बढ़ गए, प्रदेश अध्यक्ष के इस रवैया से भी कांग्रेस के दोनों कार्यकर्ता हताश होते हुए नजर आए। 

जिला कार्यकारिणी पर सवाल उठाए
रतलाम से आए कांग्रेस के निष्कासित कार्यकर्ता गौरव पोरवाल ने भास्कर को बताया कि हम तीन सौ किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हुए भोपाल आए हैं। गौरव ने बताया हम इसलिए आए हैं क्योंकि अभी रतलाम की जिला कार्यकारिणी बनी थी तो किसी को तीन पद दे दिए, किसी को चार पद दे दिए तो हमने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष जी को मैसेज पहुंचाया था कि आप संगठन में एक व्यक्ति को तीन चार पद दे रहे हैं तो ये शोभा नहीं देता।

हमारी जिलाध्यक्ष से बात हुई थी। वे कह रहे थे हमारे पास कार्यकर्ता नहीं हैं। गकांग्रेस की इतनी स्थिति खराब हो गई है कि नए कार्यकर्ता नहीं मिल रहे इसलिए आप एक-एक व्यक्ति को तीन-तीन पद दे रहे हो।

कार्यकर्ताओं को दो-दो पद देने के आरोप
गौरव पोरवाल ने चर्चा करते हुए बताया कि 21 जून को उन्होंने कार्यकर्ता सम्मान पदयात्रा रतलाम से शुरू की थी, निरंतर 8 दिन 300 किलोमीटर चलने के बाद वह भोपाल पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि रतलाम जिले की नवीन कार्यकारणी में जिला अध्यक्ष ने एक ही कार्यकर्ता को दो से तीन पद दे दिए हैं। गौरव पोरवाल और संजय रावत ने बीते चार जून को इस संबंध में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से मुलाकात की थी। 

मुलाकात के दौरान उन्होंने जिला कार्यकरणी में मूल कार्यकर्ताओं की अपेक्षा करने की शिकायत की। दोनों का प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात करना जिला अध्यक्ष को अच्छा नहीं लगा। उसके बाद जिला अध्यक्ष हर्ष विजय गहलोत के निर्देश पर संगठन महासचिव जगदीश पाटीदार ने दोनों कांग्रेस कार्यकर्ताओं को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे नाराज होकर उन्होंने मुख्य संगठन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं के सम्मान में पदयात्रा निकालने का निर्णय लिया और रास्ते भर वह कार्यकर्ता सम्मान का संदेश देते हुए भोपाल पहुंचे। उन्होंने साफ कहा है कि जब तक उनकी बात नहीं सुनी जाती वह भोपाल में ही डटे रहेंगे और जरूरत पड़ी तो आगे दिल्ली तक भी पदयात्रा कर राहुल गांधी के समक्ष अपनी बात रखेंगे।

वापसी नही हुई तो बाहर से करेंगे कांग्रेस के लिए कार्य 
गौरव ने  बातचीत करते हुए कहा कि वह कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता है, जिस दिन उनका निष्कासन हुआ उसी दिन बीजेपी की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल होने का ऑफर दिया गया था। लेकिन उन्होंने बीजेपी में शामिल होने से साफ इंकार कर दिया। गौरव ने यह भी कहा कि उन्हें कोई पद की लालसा नहीं है। वह कोई पद नहीं चाहते हैं वह एक आम कार्यकर्ता बनाकर कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने के लिए कार्य कर कार्यकर्ताओं के सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहां कि अगर कांग्रेस का मुख्य संगठन उन्हें स्पष्ट कर की उनका निष्कासन समाप्त नहीं होगा तो वह बाहर से भी बिना कांग्रेस का कार्यकर्ता होते हुए भी पार्टी के लिए काम करेंगे।

जीतू पटवारी से मिले तो जिला कांग्रेस ने निष्कासित कर दिया
गौरव ने बताया 4 जून को नामली में हम यही दरी लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के पास गए थे। उनसे बात की तो उन्होंने हमें गले लगाया और साथ में बिठाकर लेकर गए थे। उसके बाद जिला कांग्रेस कमेटी को प्रदेश अध्यक्ष से मिलना इतना बुरा लगा कि हमें पार्टी से निष्कासित कर दिया। उन्होंने हमारे पर आरोप लगाया लेकिन उनके पास ठोस सबूत आज भी नहीं हैं कि किस कारण से निष्कासित किया है।

कौन से व्यक्तियों को तीन-चार पद दिए गए हैं? एक रवि तिवारी हैं जिनके पास तीन पद हैं। प्रकाश पाटीदार के पास भी ऐसे ही पद हैं। सुनील पोरवाल के पास दो पद हैं। वे युवा कांग्रेस में भी हैं और जिला कांग्रेस में भी पद दिया गया है। मैं किसी पद पर नहीं हूं। मैं आम कार्यकर्ता हूं।

सवाल- आपकी क्या मांग है? गौरव: मेरी यही मांग है कि मुझे पद नहीं चाहिए लेकिन जो मजबूती से कांग्रेस के लिए काम करते हैं उनका सम्मान होना चाहिए।

सवाल- जीतू पटवारी से आप मिले? गौरव: जीतू पटवारी हमसे नहीं मिले। वो आए थे तो उन्होंने कहा चलो-चलो…. ये बातें शोभा नहीं देती। कार्यकर्ता अगर इतनी दूर से पैदल आया है तो उनको हमसे बात करनी चाहिए। ऐसे अगर चलो-चलो करने में रहेंगे तो फिर क्या स्थिति रहेगी। हम पार्टी का विरोध करने नहीं बैठे हैं।

सवाल: आप कब तक धरने पर बैठेंगे? गौरव: जब तक हमारी बात नहीं मानी जाती तब तक बैठेंगे। अगर लगा कि हमारी बात नहीं सुनी जा रही तो दिल्ली पैदल-पैदल जाएंगे। और अपनी बात पार्टी के सीनियर नेताओं को बताएंगे।

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UP Election: राजेंद्र गौतम ने सपा को दिया साफ संदेश, बोले- कांग्रेस बड़ी पार्टी, सीट शेयरिंग में बराबरी की हिस्सेदारी चाहिए https://news.newspaperhost.com/up-election-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6/ https://news.newspaperhost.com/up-election-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:34 +0000 https://news.newspaperhost.com/up-election-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%97%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%ae-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a6/ up-election:-राजेंद्र-गौतम-ने-सपा-को-दिया-साफ-संदेश,-बोले-कांग्रेस-बड़ी-पार्टी,-सीट-शेयरिंग-में-बराबरी-की-हिस्सेदारी-चाहिए

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन इंडिया अलायंस में सीट शेयरिंग को लेकर अभी से खींचतान शुरू हो गई है. यूपी चुनाव में संभावित गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस ने खुद को सपा से बड़ी पार्टी बताते हुए ज्यादा सीटों की डिमांड की है. नवनियुक्त कांग्रेस यूपी प्रभारी राजेंद्र गौतम ने  कहा […]]]>
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लखनऊ
 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी गठबंधन इंडिया अलायंस में सीट शेयरिंग को लेकर अभी से खींचतान शुरू हो गई है. यूपी चुनाव में संभावित गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस ने खुद को सपा से बड़ी पार्टी बताते हुए ज्यादा सीटों की डिमांड की है. नवनियुक्त कांग्रेस यूपी प्रभारी राजेंद्र गौतम ने  कहा कि यूपी में सीटों में बराबर की हिस्सेदारी होनी चाहिए. कांग्रेस बड़ा भाई है. राजेंद्र गौतम ने यूपी में समाजवादी पार्टी से गठबंधन से जुड़े सवाल पर ये बातें कहीं। 

राजेंद्र गौतम ने कांग्रेस को बताया बड़ा भाई
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग के सवाल पर कांग्रेस के राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है. कांग्रेस के नेतृत्व में आजादी मिली और देश का निर्माण हुआ. बीजेपी का मुकाबला करने की हिम्मत क्षेत्रीय पार्टियों में नहीं. इस सच को स्वीकार करना होगा. बीजेपी ने क्षेत्रीय पार्टियों के सांसदों और विधायकों को तोड़ा. कांग्रेस ही बीजेपी को हरा सकती है. कांग्रेस तो बड़ा भाई है ही, क्योंकि हम राष्ट्रीय पार्टी हैं. यूपी में हम बराबर के साझेदार हैं, भाई-भाई हैं. हिस्सेदारी और सम्मान बराबर का होनी चाहिए। 

बीएसपी को गठबंधन के लिए भेजा सिग्नल
मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी के खिलाफ संविधान बचाने वालों को एकजुट होना चाहिए. जो देश को बचाना चाहते है उन्हें एकजुट होना चाहिए. मेरा स्पष्ट मानना है कि बीजेपी के खिलाफ संविधान में विश्वास करने वाले को एक साथ होना चाहिए. कहा कि यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करेंगे. हम हर तरह के लोगों से मिलेंगे। 

सीएम योगी को बताया डरा हुआ सीएम
उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बौखलाहट में नजर आ रहे हैं. कहा कि बीजेपी भगवान श्रीराम के चंदा चोरों को बचा रही है. चंदा चोरी से बीजेपी की मंशा सामने आई है. बीजेपी का बस चले तो भविष्य में चुनाव न कराएं. न्यायपालिका डरी हुई है और चुनाव आयोग बीजेपी के लिए काम कर रहा है। 

आरोप लगाया कि सीएम योगी ने पुलिस को हत्यारा बना दिया है, गरीबों के घर बुलडोजर चल रहा है. योगी डरे हुए हैं और उनकी सत्ता जाने वाली है. चंदा चोर को बचाने की कोशिश है. कांग्रेस नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा और जीता जाएगा। 

राजेंद्र गौतम ने कहा कि यूपी चुनाव में जिस भी पार्टी के साथ गठबंधन होगा उससे बात करके ही घोषणापत्र तैयार किया जाएगा. उन्होंने ऐलान किया कि एक जुलाई से यूपी का दौरा शुरू करेंगे। 

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तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा दावा, स्टालिन बोले- थलपति विजय की सरकार बनने से पहले ही खत्म हो जाएगी चर्चा https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:33 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ac/ तमिलनाडु-की-राजनीति-में-बड़ा-दावा,-स्टालिन-बोले-थलपति-विजय-की-सरकार-बनने-से-पहले-ही-खत्म-हो-जाएगी-चर्चा

चेन्नई तमिलनाडु में CM थलपति विजय की सरकार को लेकर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बहुत बड़ा दावा कर दिया है। स्टालिन ने कहा है कि विजय की सरकार जल्द ही गिर सकती है और राज्य में जल्दी चुनाव भी हो सकते हैं। राज्य में बीते महीने आए चुनाव परिणामों के बाद […]]]>
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चेन्नई

तमिलनाडु में CM थलपति विजय की सरकार को लेकर तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने बहुत बड़ा दावा कर दिया है। स्टालिन ने कहा है कि विजय की सरकार जल्द ही गिर सकती है और राज्य में जल्दी चुनाव भी हो सकते हैं। राज्य में बीते महीने आए चुनाव परिणामों के बाद सत्ता से बाहर होने वाली मुख्य विपक्षी दल द्रमुक (DMK) के अध्यक्ष स्टालिन ने रविवार रात एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह बातें कही हैं। उन्होंने इस दौरान राज्य में बहुत जल्द मध्यावधि चुनाव होने की भविष्यवाणी भी की।

स्टालिन ने दावा किया कि अभिनेता से नेता बने मुख्यमंत्री विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार के पास बहुमत नहीं है और अगले 3 से 6 महीनों के भीतर राज्य में विधानसभा चुनाव दोबारा हो सकते हैं। पार्टी कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए स्टालिन ने टीवीके सरकार के आंकड़ों का गणित भी समझाया।

क्या बोले स्टालिन?
बता दें कि तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए कम से कम 118 सीटें चाहिए। हालिया विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी टीवीके सबसे पार्टी बन कर उभरी थी। लेकिन TVK केवल 108 सीटें ही जीत सकी थी। इसके बाद विजय ने कांग्रेस, IUML और VCK जैसे दलों के समर्थन से सरकार बनाई। स्टालिन ने इन दलों का हवाला देते हुए आगे कहा कि टीवीके सरकार अपने दम पर नहीं, बल्कि द्रमुक गठबंधन के पूर्व सहयोगियों के समर्थन के भरोसे ही चल रही है। उन्होंने कहा, “चुनाव कभी भी आ सकते हैं। यह जल्द ही हो सकते हैं, तीन महीने बाद या छह महीने बाद आ सकते हैं, क्योंकि मौजूदा सरकार अपने दम पर बहुमत से नहीं जीती है। बहुमत का मतलब 234 सदस्यों वाले सदन में 118 सीटें हासिल करना है, लेकिन उन्होंने हालिया विधानसभा चुनावों में केवल 108 सीटें ही जीतीं।”

कार्यकर्ताओं को तैयार रहने का आदेश
स्टालिन ने कहा कि आगामी चुनावों को देखते हुए द्रमुक कैडरों को चुनावी मोड में रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “टीएमसी सरकार का इंजन कहां जाकर रुकेगा, कोई नहीं जानता। चुनाव किसी भी क्षण, किसी भी स्थिति में आ सकते हैं। हमें इसके लिए 100 फीसदी तैयार रहना होगा। आप सभी आज और इसी वक्त से चुनावी तैयारियों में जुट जाएं।”

कानून व्यवस्था को लेकर घेरा
इस दौरान स्टालिन ने कानून-व्यवस्था से लेकर आर्थिक मोर्चे पर सरकार को बुरी तरह घेरा। स्टालिन ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। महिला और बच्चों के खिलाफ अपराध बढ़ गए हैं। वहीं राज्य में अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है और सरकार की खराब नीतियों के कारण बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज तमिलनाडु छोड़कर दूसरे राज्यों में जा रही हैं।

MDMK ने भी छोड़ा साथ
स्टालिन का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब द्रमुक के एक और पुराने सहयोगी MDMK ने DMK गठबंधन छोड़ने का ऐलान कर दिया है। 2 महीने में यह स्टालिन के लिए दूसरा बड़ा झटका है। इससे पहले कांग्रेस ने भी DMK लेड अलायंस का साथ छोड़ दिया और विजय की सरकार को समर्थन दे दिया। DMK ने तब इसे विश्वासघात कहा था।

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मोदी कैबिनेट विस्तार की चर्चा तेज, दूसरी पार्टियों से आए सांसदों को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:32 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%9a/ मोदी-कैबिनेट-विस्तार-की-चर्चा-तेज,-दूसरी-पार्टियों-से-आए-सांसदों-को-मिल-सकती-है-बड़ी-जिम्मेदारी

नई दिल्ली कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा […]]]>
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नई दिल्ली

कैबिनेट फेरबदल का ऐलान मंगलवार को हो सकता है। हालांकि, केंद्र सरकार की तरफ से तारीख को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से भारत लौटने के बाद मंत्री परिषद में बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नाम की है। फिलहाल, साफ नहीं हो सका है कि उन्हें लेकर NDA की तरफ से क्या फैसला लिया जाएगा।

खास बात है इस बार कैबिनेट फेरबदल में हाल ही में पार्टियों की टूट के बाद NDA को समर्थन देने वाले नेताओं को भी जगह दी जा सकती है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) और आम आदमी पार्टी के सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया था।

मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। वह 6 से 11 जुलाई के बीच तीन देशों की यात्रा कर सकते हैं, जिनमें इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल है। वहीं जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी भारत दौरे पर आ रहीं हैं और यह कार्यक्रम 1 से 3 जुलाई का है।

अब संसद का मॉनसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है, जो अगस्त तक चलेगा। ऐसे में अटकलें तेज हैं कि मंगलवार को बड़ी घोषणा की जा सकती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद यह पहली बार फेरबदल होगा।

मानसून सत्र से पहले हो सकता है कैबिनेट फेरबदल
संसद का मानसून सत्र आम तौर पर जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है। मंत्रिमंडल में फेरबदल की तारीख प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय किए जाने की संभावना है। प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं। उनके छह से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची का भी एक से तीन जुलाई तक नयी दिल्ली की यात्रा का कार्यक्रम है।

पार्टी संगठन पर भी फोकस
सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं। दो केंद्रीय मंत्रियों पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः बीजेपी की उत्तर प्रदेश और दिल्ली इकाई की जिम्मेदारी पहले ही दी जा चुकी है।
‘एक व्यक्ति एक पद’ का नियम होगा लागू
इस बात की प्रबल संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने नियम का पालन करेगी जिसके कारण दोनों को सरकार से हटना पड़ सकता है। दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू को हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के लिए पार्टी ने दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया। उच्च सदन में उनका कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो गया। कुरियन अपने पद से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं जबकि बिट्टू अब भी मंत्री हैं।

रवनीत सिंह बिट्टू को लेकर चल रही ये चर्चा
ऐसा बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने बिट्टू को आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है। कांग्रेस के पूर्व नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र बिट्टू प्रभावशाली जाट सिख समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए इन तीन राज्यों के और प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह मिलने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी की भारी जीत के बाद राज्य से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।

TMC, शिवसेना-UBT, AAP से आए MPs को मिल सकता है मौका
तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। ऐसी भी संभावना है कि शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों में से एक या दो को मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बागी गुटों के सदस्यों को मंत्रिपरिषद में शामिल करने का कोई भी फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा। दोनों के मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।

राष्ट्रपति से मिले पीएम मोदी, तभी से शुरू हुई चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी की 23 जून को राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के इतर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हो गईं। इसके दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से मुलाकात से इन अटकलों को और बल मिला। अधिकारियों ने इन मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया और कहा कि दोनों नेता नियमित अंतराल पर राष्ट्रपति से मिलते रहते हैं। हालांकि, इस बात की प्रबल संभावना है कि प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान मंत्रिमंडल में फेरबदल के मुद्दे पर भी चर्चा हुई होगी।

हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को लेकर भी अपडेट
दो केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बी एल वर्मा का राज्यसभा में कार्यकाल नवंबर में समाप्त होगा। अब यह देखना होगा कि उच्च सदन के लिए उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में शीर्ष नेतृत्व क्या फैसला करता है। तीन राज्यपालों-कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह-का कार्यकाल आने वाले महीनों में पूरा होने वाला है।

गहलोत और पटेल का कार्यकाल जुलाई में तथा सिंह का कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा। सरकार से हटाए जाने वाले कुछ मंत्रियों को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी दिए जाने की भी संभावना है। हालांकि, जानकार हलकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े फैसलों को अंतिम समय तक गोपनीय रखते हैं और औपचारिक घोषणा होने पर ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

कौन हो सकता है शामिल
अब तक यह साफ नहीं है कि कैबिनेट फेरबदल में किसे मौका मिलने जा रहा है। अटकलें हैं कि नए सदस्यों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, पूर्व RBI गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व CM नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ, राघव चड्ढा को शामिल किया जा सकता है।

इनका कट सकता है नाम
कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी को बदला जा सकता है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे लेकर कुछ नहीं कहा गया है। संभव है कि इन मंत्रियों के विभाग भी बदले जा सकते हैं। साथ ही मंत्री बीएल वर्मा का भी राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है। कहा यह भी जा रहा है कि 6 राज्यमंत्री भी बदले जा सकते हैं। इनके अलावा मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के विभाग बदले जा सकते हैं।

संतुलन बनाने की कोशिश
एजेंसी भाषा के सूत्रों के अनुसार, सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच यह राय प्रबल हो रही है कि अहम मंत्रालयों में नए चेहरों को शामिल किए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा से जुड़े समीकरणों को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाने की राजनीतिक मजबूरियां भी हैं।

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एक ही फ्लाइट में फडणवीस-उद्धव, शिंदे के बयान से बढ़ी सियासी हलचल https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a6/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a6/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:31 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%a3%e0%a4%b5%e0%a5%80%e0%a4%b8-%e0%a4%89%e0%a4%a6/ एक-ही-फ्लाइट-में-फडणवीस-उद्धव,-शिंदे-के-बयान-से-बढ़ी-सियासी-हलचल

 मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय अचानक सरगर्मी बढ़ गई, जब दो धुर विरोधी नेता एक ही फ्लाइट में एक साथ सफर करते नजर आएं। दोनों नेता मुंबई से नागपुर जा रही एक फ्लाइट में बैठे थे। सीएम देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की इस हवाई यात्रा खबरों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे […]]]>
एक-ही-फ्लाइट-में-फडणवीस-उद्धव,-शिंदे-के-बयान-से-बढ़ी-सियासी-हलचल

 मुंबई
 महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय अचानक सरगर्मी बढ़ गई, जब दो धुर विरोधी नेता एक ही फ्लाइट में एक साथ सफर करते नजर आएं। दोनों नेता मुंबई से नागपुर जा रही एक फ्लाइट में बैठे थे। सीएम देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे की इस हवाई यात्रा खबरों पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का रिएक्शन आया है।

दरअसल, शिंदे से जब फडणवीस और उद्धव के एक ही विमान में सफर करने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस इतने समझदार हैं कि उन्हें अच्छी तरह पता है कि चालाक और षड्यंत्रकारी दोस्त कितना खतरनाक हो सकता है।

2019 चुनाव को लेकर क्या कहा?
एकनाथ शिंदे ने 2019 चुनाव की ओर इशारा करते हुए बोले कि जब भाजपा और तत्कालीन अविभाजित शिवसेना ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव एक साथ लड़ा था, लेकिन बाद में ठाकरे द्वारा कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार बनाने के बाद वे अलग हो गए थे।

आने वाले दिनों में पता चलेगा परिणाम
ठाकरे से उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के साथ एक ही विमान में यात्रा करने के बारे में पूछा गया, तो शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख ने कहा कि दोनों के बीच उच्च स्तरीय चर्चा हुई थी। वहीं जब उनसे बातचीत के परिणाम के बारे में पूछा गया, तो ठाकरे ने कहा कि आने वाले दिनों में इसका परिणाम पता चल जाएगा, जिससे राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिली।

हालांकि, भाजपा ने बैठक के किसी भी राजनीतिक महत्व को खारिज करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद विभिन्न दलों के नेता अक्सर सौहार्दपूर्ण व्यक्तिगत संबंध साझा करते हैं।

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तमिलनाडु में नया सियासी विवाद: फिल्म प्रोड्यूसर को दिल्ली में विशेष प्रतिनिधि बनाया गया https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b5/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b5/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:30 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a4%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a5%81-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%b5/ तमिलनाडु-में-नया-सियासी-विवाद:-फिल्म-प्रोड्यूसर-को-दिल्ली-में-विशेष-प्रतिनिधि-बनाया-गया

चेन्नई तमिलनाडु सरकार के एक फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कारोबारी और फिल्म प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है। इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। विपक्ष ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर […]]]>
तमिलनाडु-में-नया-सियासी-विवाद:-फिल्म-प्रोड्यूसर-को-दिल्ली-में-विशेष-प्रतिनिधि-बनाया-गया

चेन्नई
तमिलनाडु सरकार के एक फैसले ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कारोबारी और फिल्म प्रोड्यूसर के. वेंकट नारायण को नई दिल्ली में तमिलनाडु का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है। इस पद को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। विपक्ष ने इस नियुक्ति को लेकर सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है।
एक साल के लिए बनाया गया नया पद

राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यह पद फिलहाल एक साल के लिए बनाया गया है। मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी किया। नियुक्ति की बाकी शर्तों की घोषणा बाद में की जाएगी।

क्या होता है स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव का काम?
नई दिल्ली में तमिलनाडु के स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव की जिम्मेदारी केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच तालमेल बनाने की होती है।

इस पद पर बैठा व्यक्ति मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की बैठकों का समन्वय करता है, केंद्र की योजनाओं और फंडिंग पर नजर रखता है, नीति से जुड़े मामलों की निगरानी करता है और संसद सत्र के दौरान राज्य के सांसदों के साथ समन्वय बनाने में मदद करता है।

अब तक इस अहम पद पर आमतौर पर अनुभवी राजनेताओं की नियुक्ति होती रही है।
कौन हैं के. वेंकट नारायण?

के. वेंकट नारायण बेंगलुरु स्थित KVN ग्रुप के चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी रियल एस्टेट और एंटरटेनमेंट सेक्टर में काम करती है।

वह पहले प्रेस्टीज ग्रुप के CEO भी रह चुके हैं। साल 2020 में उन्होंने KVN प्रोडक्शंस की शुरुआत की और अब वही कंपनी मुख्यमंत्री विजय की आखिरी फिल्म ‘जना नायकन’ को प्रोड्यूस कर रही है। माना जा रहा है कि राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले यह विजय की अंतिम फिल्म होगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल

इस नियुक्ति को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है।
DMK के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने कहा कि तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने वाले इतने अहम पद पर एक फिल्म प्रोड्यूसर की नियुक्ति करना उस पद की गरिमा को कम करता है।

वहीं BJP के तमिलनाडु अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने सवाल उठाया कि कर्नाटक से करीबी संबंध रखने वाला व्यक्ति दिल्ली में तमिलनाडु का प्रभावी प्रतिनिधित्व कैसे करेगा। उन्होंने इसे राज्य के लोगों के साथ “बड़ा विश्वासघात” बताया।

AIADMK ने आरोप लगाया कि सरकार कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के इशारों पर काम कर रही है, जबकि AMMK प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने कहा कि सरकार प्रशासनिक योग्यता के बजाय निजी करीबी लोगों को बड़े पद दे रही है।
TVK ने किया बचाव

विजय की पार्टी TVK ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया।
पार्टी नेताओं का कहना है कि वेंकट नारायण ने फिल्म ‘जना नायकन’ के निर्माण के दौरान विजय का मुश्किल समय में साथ दिया था और यह नियुक्ति उसी सहयोग के प्रति आभार जताने का तरीका है।

पार्टी का यह भी कहना है कि वेंकट नारायण को बड़े कॉर्पोरेट और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट संभालने का लंबा अनुभव है, इसलिए उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पहले ज्योतिषी, अब प्रोड्यूसर… बढ़ा विवाद
यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री विजय अपने करीबी लोगों की नियुक्तियों को लेकर विवादों में आए हैं।

इससे पहले उनके लंबे समय से मैनेजर रहे जगदीश पलानीस्वामी को प्राइवेट सेक्रेटरी (पॉलिटिकल) बनाया गया था।

वहीं ज्योतिषी रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल को ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (पॉलिटिकल) (OSD) नियुक्त किया गया था, लेकिन भारी आलोचना के बाद सरकार को वह फैसला वापस लेना पड़ा।

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दिल्ली में राहुल गांधी के ‘गुमशुदा’ पोस्टर, सियासत तेज—किसने लगाए सवाल अनसुलझा https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:29 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87/ दिल्ली-में-राहुल-गांधी-के-‘गुमशुदा’-पोस्टर,-सियासत-तेज—किसने-लगाए-सवाल-अनसुलझा

नई दिल्ली कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर दिल्ली के कुछ इलाकों में पोस्टर लगे हैं। इन पोस्टर्स में राहुल गांधी को ‘गुमशुदा’ बताया गया है। इसमें उनके नाम के साथ पहचान का भी जिक्र किया गया है। दिल्ली के फिरोजशाह रोड समेत कई जगह पर राहुल गांधी के […]]]>
दिल्ली-में-राहुल-गांधी-के-‘गुमशुदा’-पोस्टर,-सियासत-तेज—किसने-लगाए-सवाल-अनसुलझा

नई दिल्ली
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर दिल्ली के कुछ इलाकों में पोस्टर लगे हैं। इन पोस्टर्स में राहुल गांधी को ‘गुमशुदा’ बताया गया है। इसमें उनके नाम के साथ पहचान का भी जिक्र किया गया है। दिल्ली के फिरोजशाह रोड समेत कई जगह पर राहुल गांधी के गुमशुदा होने के पोस्टर सामने आए हैं। जैसे ही ये पोस्टर सामने सवाल उठा कि आखिर इसे किसने लगाया है। ऐसा इसलिए क्योंकि पोस्टर में इसे लगवाने वालों को संदर्भ में कोई जानकारी नहीं दी गई है। उधर बीजेपी ने कांग्रेस नेता के इस पोस्टर पर निशाना साधा है।

राहुल गांधी के ये पोस्टर किसने लगवाए?
दिल्ली में राहुल गांधी के गुमशुदा होने के पोस्टर रविवार को नजर आए। यह सब ऐसे वक्त में हुआ है जब केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी राहुल गांधी की कथित विदेश यात्रा को लेकर उन पर लगातार हमले कर रही है। एक दिन पहले ही केंद्र की सत्ताधारी बीजेपी ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया था कि जब भी संसद, चुनाव या उनकी पार्टी को उनकी जरूरत होती है, तो वह गायब रहते हैं। यही नहीं राहुल गांधी ‘एक और विदेश यात्रा’ पर चले जाते हैं।

बीजेपी के निशाने पर राहुल गांधी
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस संबंध में कांग्रेस सांसद पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के लिए LoP का मतलब ‘Leader of the Opposition’ (विपक्ष के नेता) नहीं, बल्कि ‘Leader of Paryatan (लीडर ऑफ पर्यटन) and Partying’ (पर्यटन और पार्टी करने वाले नेता) है। शहजाद पूनावाला ने एक वीडियो बयान में कहा कि राहुल गांधी को LoP का नाम बदलकर ‘Leader of Paryatan and Partying’ कर देना चाहिए क्योंकि वह हमेशा यही करते हैं- पार्टी करना, घूमना-फिरना और यात्रा करना।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने क्या कहा
    बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक जिम्मेदारियों से ज्यादा विदेश यात्राओं को अहमियत देते हैं।
    उन्होंने ये भी दावा किया कि वह लोगों, संसद या देश को प्राथमिकता नहीं देते। वह घूमना-फिरना ज्यादा पसंद करते हैं।
    बीजेपी नेता बोले- अहम मौकों पर, जब पार्टी को संगठनात्मक मदद की जरूरत होती है, तो वह बाहर चले जाते हैं।
    ‘संसद सत्र के दौरान भी वह चले जाते हैं। राहुल गांधी हमेशा छुट्टियों के मूड में रहते हैं।’
    शहजाद पूनावाला ने ये टिप्पणी ऐसे समय में की है जब राष्ट्रीय राजधानी में कई अहम जगहों पर राहुल गांधी की तस्वीर के साथ ‘गुमशुदा’ लिखे पोस्टर देखे गए। यह तुरंत पता नहीं चल सका कि ये पोस्टर किसने लगाए थे।

पीएम मोदी और राहुल गांधी की तुलनाकर ये बोले पूनावाला
शहजाद पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता के बीच तुलना की और दावा किया कि बार-बार विदेश यात्राओं के कारण राहुल गांधी ‘सबसे लंबे समय तक विपक्ष के नेता’ बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ, प्रधानमंत्री मोदी देश के सबसे लंबे समय तक चुने गए प्रधानमंत्री बन गए हैं। मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर, सरकार के प्रमुख के रूप में 9,000 से ज्यादा दिनों तक उन्होंने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली है। इसे ही काम करने का तरीका या सेवा भाव कहते हैं। दूसरी तरफ, राहुल गांधी सबसे लंबे समय तक विपक्ष के नेता बन सकते हैं क्योंकि वह तो बस छुट्टियों पर ही रहते हैं।”

 

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अमित शाह की नागा विधायकों से बैठक पर मणिपुर की सियासत गरमाई, कांग्रेस ने उठाए सवाल https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:28 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82/ अमित-शाह-की-नागा-विधायकों-से-बैठक-पर-मणिपुर-की-सियासत-गरमाई,-कांग्रेस-ने-उठाए-सवाल

नई दिल्ली केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठख में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे, लेकिन इस बैठक के बाद अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सवाल उठाया कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की बैठक के […]]]>
अमित-शाह-की-नागा-विधायकों-से-बैठक-पर-मणिपुर-की-सियासत-गरमाई,-कांग्रेस-ने-उठाए-सवाल

नई दिल्ली
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने शनिवार को मणिपुर के नागा समुदाय के विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठख में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद थे, लेकिन इस बैठक के बाद अटकलों का दौर तब शुरू हुआ जब कांग्रेस की मणिपुर इकाई ने सवाल उठाया कि आखिर विधायकों और गृहमंत्री की बैठक के बीच मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह मौजूद क्यों नहीं थे? कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर मणिपुर के नागा विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के

बीच में बैठक मणिपुर सीएम के बिना कैसे आयोजित हो सकती है?
इस बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मणिपुर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा। कांग्रेस विधायक दल के नेता केशम मेघचंद्र सिंह ने कहा कि इस बैठख के बाद भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। विधायकों और केंद्रीय गृहमंत्री के बीच की बैठक से मुख्यमंत्री को अलग रखना यह पद की गरिमा और उसके अधिकार को कम करता है। इसके साथ ही उन्होंने विधायकों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री से मिलने के लिए पहुंचे उप मुख्यमंत्री लोसी दीखो पर भी सवाल उठाया।

विधायकों को अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं- कांग्रेस
मेघचंद्र ने कहा, “यह बैठक दिखाती है कि उपमुख्यमंत्री लोसी दीखो और नागा विधायकों को अपने ही मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है। इसलिए तो वह बिना मुख्यमंत्री के सीधे नागा विधायकों से मिलने के लिए पहुंचे हैं।” इसके अलावा उन्होंने बैठक में मौजूद नागालैंड के मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य का प्रशासन राज्य के निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से होना चाहिए न कि पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री के द्वारा आखिर

मणिपुर के विधायकों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नागालैंड के सीएम ने क्यों किया?
दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन पर कटाक्ष करते हुए मेघचंद्र ने कहा कि राज्य में पर्याप्त सुरक्षा होने के कबाद भी डिप्टी सीएम का दिल्ली में रहना यह दिखाता है कि उनकी प्राथमिकता क्या है। वह राज्य की नहीं केंद्र की राजनीति करना चाहते हैं। इतना ही नहीं मेघचंद्र ने सीएम को कागजी शेर करार देते हुए कहा कि राज्य के शासन पर उनका प्रभाव खत्म हो गया है।

कांग्रेस की तरफ से उठाए गए इन सवालों का अभी तक भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।

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