देश – My Blog https://news.newspaperhost.com My WordPress Blog Wed, 01 Jul 2026 14:20:16 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0 यूपी में एआई आधारित एक्स-रे, एमआरआई मशीनों से आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी जल्द। https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b0-2/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b0-2/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:16 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%8f%e0%a4%86%e0%a4%88-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%8f%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%b0-2/ यूपी-में-एआई-आधारित-एक्स-रे,-एमआरआई-मशीनों-से-आधुनिक-स्वास्थ्य-सेवाएं-मिलेंगी-जल्द।

लखनऊ  योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम […]]]>
यूपी-में-एआई-आधारित-एक्स-रे,-एमआरआई-मशीनों-से-आधुनिक-स्वास्थ्य-सेवाएं-मिलेंगी-जल्द।

लखनऊ
 योगी सरकार ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुलभ और तकनीक आधारित बनाने क दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रदेशवासियों को अत्याधुनिक एवं निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा उत्तर प्रदेश सरकार के बीच प्रधानमंत्री निधि के तहत एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन, 1.5 टेस्ला एमआरआई एवं डिजिटल मैमोग्राफी टोमोसिंथेसिस (डीबीटी) मशीनों की आपूर्ति, स्थापना एवं संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता जून-26 से मार्च-36 तक प्रभावी रहेगा। इससे प्रदेश के नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके निकट ही आधुनिक रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग सेवाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान संभव होगी, उपचार में होने वाली देरी कम होगी तथा मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

एआई आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक से कैंसर और हृदय रोग की सटीक हो सकेगी पहचान
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि यह पहल उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक इमेजिंग तकनीक के उपयोग से कैंसर, क्षय रोग (टीबी), हृदय रोग सहित अन्य गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का प्रारंभिक चरण में सटीक निदान संभव हो सकेगा। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीजों का उपचार अधिक प्रभावी होगा और मृत्यु दर में कमी लाने में भी सहायता मिलेगी।

एमओयू का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाना है। विशेष रूप से ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां अब तक उन्नत जांच सुविधाएं सीमित रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में क्षेत्रीय असमानता भी कम होगी और लोगों को बड़े शहरों के अस्पतालों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एमओयू के अनुसार भारत सरकार मशीनों की केंद्रीकृत खरीद, आपूर्ति, स्थापना, कमीशनिंग तथा प्रारंभिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी निभाएगी।

वहीं उत्तर प्रदेश सरकार संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करेगी, साइट की तैयारी सुनिश्चित करेगी, सभी आवश्यक नियामकीय अनुमतियां प्राप्त करेगी तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता के साथ उपकरणों के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी। इस समन्वित व्यवस्था से परियोजना का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए विकसित किया जाएगा रीयल टाइम आईटी पोर्टल
एमओयू के अनुसार, सभी मशीनों की कार्यप्रणाली की निगरानी के लिए एक अत्याधुनिक रीयल टाइम आईटी पोर्टल विकसित किया जाएगा। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रत्येक मशीन की कार्यशीलता, उपयोग की स्थिति, उपलब्ध कराई गई सेवाओं, जांच कराने वाले लाभार्थियों की संख्या तथा उपकरणों के प्रदर्शन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और आवश्यकतानुसार त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव हो सकेगी।

उपकरणों के दीर्घकालिक संचालन को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री निधि के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली सभी मशीनों पर एक वर्ष की वारंटी के बाद अगले नौ वर्षों तक व्यापक वार्षिक अनुरक्षण की व्यवस्था भी की गई है। इससे मशीनों के रखरखाव में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी तथा मरीजों को लगातार गुणवत्तापूर्ण जांच सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार रहेगा अनिवार्य, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र बोले- आदेश वापस नहीं होगा https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:15 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%9b%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%97%e0%a4%a2%e0%a4%bc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%82/ छत्तीसगढ़-के-सरकारी-स्कूलों-में-मंत्रोच्चार-रहेगा-अनिवार्य,-शिक्षा-मंत्री-गजेन्द्र-बोले-आदेश-वापस-नहीं-होगा

रायपुर. छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आदेश को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. आदिवासी संगठन, ईसाई संस्थाओं के साथ कांग्रेस ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस घटनाक्रम के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंन्द्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि बच्चों […]]]>
छत्तीसगढ़-के-सरकारी-स्कूलों-में-मंत्रोच्चार-रहेगा-अनिवार्य,-शिक्षा-मंत्री-गजेन्द्र-बोले-आदेश-वापस-नहीं-होगा

रायपुर.

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार के आदेश को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है. आदिवासी संगठन, ईसाई संस्थाओं के साथ कांग्रेस ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है. इस घटनाक्रम के बीच स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंन्द्र यादव का बड़ा बयान सामने आया है.

उन्होंने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार देने के उद्देश्य से मंत्रोच्चार कराने का फैसला लिया गया, लेकिन दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने इसके खिलाफ कोर्ट में याचिका लगाई है. शिक्षा गजेन्द्र यादव का कहना है कि फिलहाल सरकारी स्कूलों में निर्बाध रूप से मंत्रोच्चार चलेगा. मामले में कोर्ट जो फैसला सुनाएगी, उसके अनुसार आगे होगा. सरकार अपने आदेश पर कायम है और अदालत का जो भी फैसला आएगा, उसके अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी.

रिटायर्ड शिक्षकों को बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र 2026-27 के दौरान रिटायर होने वाले शिक्षकों को बड़ी राहत दी गई है. वह पूरे शैक्षणिक सत्र तक पढ़ा सकेंगे. इस फैसले को लेकर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बताया कि शैक्षणिक सत्र के बीच अगर कोई शिक्षक रिटायर होता है तो वह सत्र के आखिर तक स्कूलों में पढ़ा सकेगा. हालांकि अगर कोई ऐसा नहीं करना चाहता है, तो यह अलग विषय है, लेकिन ज्यादातर लोगों की इस पर सहमती रहती है.

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GST कलेक्शन से सरकार की बल्ले-बल्ले, जून में ₹1.94 लाख करोड़ की रिकॉर्ड वसूली https://news.newspaperhost.com/gst-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87/ https://news.newspaperhost.com/gst-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:14 +0000 https://news.newspaperhost.com/gst-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%87/ gst-कलेक्शन-से-सरकार-की-बल्ले-बल्ले,-जून-में-₹1.94-लाख-करोड़-की-रिकॉर्ड-वसूली

नई दिल्ली  सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन […]]]>
gst-कलेक्शन-से-सरकार-की-बल्ले-बल्ले,-जून-में-₹1.94-लाख-करोड़-की-रिकॉर्ड-वसूली

नई दिल्ली

 सरकारी खजाने में जून के महीने में जबरदस्त उछाल आया है. जीएसटी को लेकर सामने आए ताजा आंकड़े के मुताबिक, जून 2026 में भारत का जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) कलेक्शन सालाना आधार पर 13.9% बढ़कर 1.95 लाख करोड़ (1,94,812 करोड़ रुपये) पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल जून में यह कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ था. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जून महीने के जीएसटी कलेक्शन में यह बढ़ोतरी पिछले 13 महीनों में सबसे तेज है। 

कहां से सरकार को हुई कितनी कमाई? 
कमाई में सबसे ज्यादा उछाल आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैक्स से आया है, जो 34.6% बढ़कर 60,038 करोड़ हो गया, जो पिछले साल जून में 44,608 करोड़ रुपये था. जून में घरेलू व्यापार से होने वाली वसूली सालाना आधार पर 6.5% बढ़कर 1,34,774 करोड़ रुपये हो गया, जो पहले 1,26,505 करोड़ रुपये था. जून में नेट GST रेवेन्यू 11.2% बढ़कर 1,62,377 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 1,45,984 करोड़ रुपये था. वहीं, जून में टोटल रिफंड 29.1% बढ़कर 32,436 करोड़ हो गए। 

GST रिफंड में भी हुई बढ़ोतरी
आंकड़ों के मुताबिक जून में GST रिफंड में भी 29.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस बार का GST रिफंड ₹32,436 करोड़ रुपए रहा है, जो कि पिछले साल की इस अवधि में ₹25,121 करोड़ था। रिफंड को हटाकर जून में शुद्ध जीएसटी कलेक्शन ₹1,62,377 करोड़ रहा है, जो कि जून 2025 में 1,45,984 करोड़ रुपए था। इसमें सालाना आधार पर 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

पहली तिमाही में 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल जीएसटी का कलेक्शन ₹6,31,699 करोड़ रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में ₹5,82,542 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में सालाना आधार पर 8.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में सरकार ने ₹91,482 करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है, जिससे शुद्ध जीएसटी संग्रह ₹5,40,218 करोड़ रह गया है।

सबसे अधिक GST कलेक्शन वाले राज्य
जून में जीएसटी कलेक्शन में टॉप पांच राज्यों में महाराष्ट्र (₹9,924 करोड़), गुजरात (₹4,333 करोड़), कर्नाटक (₹4,118 करोड़), तमिलनाडु (₹3,639 करोड़) और उत्तर प्रदेश (₹3,249 करोड़) का नाम शामिल था। बता दें कि 9 साल पहले 1 जुलाई, 2017 को GST को पूरे देश में लागू किया गया था। इसके चलते वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), सेल्स टैक्स जैसे कई कर समाप्त हुए और देश में एक कर व्यवस्था लागू हो सकी है, जिससे देश में कारोबार करना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया।

घरेलू खपत और विदेशी व्यापार की ताकत
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज LLP के पार्टनर विवेक जालान ने कहा है कि जून 2026 में भारत का GST रेवेन्यू घरेलू खपत की मजबूती और विदेशी व्यापार की ताकत, दोनों को दिखाता है। नेट GST कलेक्शन में 11.2% की बढ़ोतरी हुई। GST 2.0 में दरों में कटौती और स्टॉक पर जमा इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के लगातार असर (जिसके 9-12 महीने तक रहने की उम्मीद है) के बावजूद घरेलू रेवेन्यू में 2.6% की वृद्धि हुई।
यह दिखाता है कि स्ट्रक्चरल बदलावों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत इनपुट सर्विसेज पर ITC जमा होने जैसी चुनौतियों के बावजूद खपत मजबूत बनी हुई है।

खास बात यह है कि जून में इंपोर्ट रेवेन्यू में 34.6% और साल-दर-साल आधार पर 26.2% की भारी बढ़ोतरी हुई। यह कैपिटल गुड्स और रॉ मटीरियल की मजबूत मांग को दिखाता है, जो औद्योगिक विकास को बढ़ावा देते हैं। इस तेजी को GSTAT अपीलों के लिए किए गए प्री-डिपॉजिट और अगस्त 2026 की समय-सीमा (टाइम बार) से पहले FY 2020-21 के लिए सेक्शन 74 के तहत SCN जारी करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों से भी सहारा मिला।

राज्यवार किसका कैसा रहा प्रदर्शन?

    महाराष्ट्र 30,714 करोड़ के जीएसटी कलेक्शन के साथ टॉप पर है.
    कर्नाटक और गुजरात ने भी क्रमशः ₹12,937 करोड़ और 11,743 करोड़ रुपये का कलेक्शन दर्ज किया है। 

    बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा. यहां का GST कलेक्शन पिछले साल के मुकाबले 19% बढ़कर 9,165 करोड़ तक पहुंच गया। 
    तमिलनाडु, राजस्थान और मध्य प्रदेश में क्रमशः 2%, 5% और 5% की गिरावट दर्ज की गई। 

कुल मिलाकर इस साल जीएसटी में ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन विदेशी सामानों का आयात रहा. इसके अलावा, देश में वस्तुओं व सामानों की मजबूत मांग के कारण भी जीएसटी कलेक्शन में उछाल आया है. ऊपर से डिजिटल इकोसिस्टम और टैक्स प्रशासन में बेहतरी के लिए भी जीएसटी कलेक्शन मजबूत हुआ है। 

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MP के 2 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, 9 साल बाद पदोन्नति का रास्ता साफ; मोहन सरकार ने शुरू की तैयारी https://news.newspaperhost.com/mp-%e0%a4%95%e0%a5%87-2-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-2/ https://news.newspaperhost.com/mp-%e0%a4%95%e0%a5%87-2-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-2/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:13 +0000 https://news.newspaperhost.com/mp-%e0%a4%95%e0%a5%87-2-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-2/ mp-के-2-लाख-कर्मचारियों-के-लिए-बड़ी-खुशखबरी,-9-साल-बाद-पदोन्नति-का-रास्ता-साफ;-मोहन-सरकार-ने-शुरू-की-तैयारी

भोपाल  मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय मिलने के बाद प्रशासन ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर […]]]>
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भोपाल 
मध्य प्रदेश के करीब दो लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए लंबे समय से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया जल्द शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है। लगभग नौ वर्षों से लंबित प्रमोशन को लेकर सरकार को महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) की कानूनी राय मिलने के बाद प्रशासन ने सभी विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो कर्मचारियों को पदोन्नति न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन मिलेगी। सरकार ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन से कानूनी राय ली थी। राय में स्पष्ट किया गया कि इन नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाईकोर्ट में लंबित जरूर हैं, लेकिन हाईकोर्ट ने नियमों के क्रियान्वयन पर कोई अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। इसलिए नियम पूरी तरह प्रभावी हैं और इनके तहत पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। 

सभी विभागों और कलेक्टरों को भेजे गए निर्देश
कानूनी राय मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों के प्रभारी सचिवों, विभागाध्यक्षों और सभी जिला कलेक्टरों को पत्र भेजकर राय का परीक्षण करने और आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि सरकार जल्द ही विभागीय पदोन्नति समितियों (डीपीसी) की बैठकें बुलाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
कानूनी राय में सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश बनाम विनय कुमार बबेले’ मामले सहित हाईकोर्ट के कई आदेशों का उल्लेख किया गया है। इनमें कहा गया है कि केवल नियमों को अदालत में चुनौती दिए जाने भर से सरकार पदोन्नति प्रक्रिया नहीं रोक सकती। हालांकि, सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। 

मौखिक आश्वासन को नहीं माना गया बाध्यकारी
राय में यह भी कहा गया कि जब पदोन्नति नियम-2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शुरुआती सुनवाई हुई थी, तब सरकार की ओर से केवल मौखिक रूप से यह कहा गया था कि सुनवाई पूरी होने तक पदोन्नति नहीं की जाएगी। लेकिन यह आश्वासन किसी न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं बना था, इसलिए इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।

नई बेंच करेगी सुनवाई
17 फरवरी 2026 को याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था, लेकिन इस बीच एक न्यायाधीश के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने और दूसरे के स्थानांतरण के कारण फैसला नहीं आ सका। अब यह मामला नई खंडपीठ के समक्ष फिर से सुना जाएगा। ऐसे में अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है, जिससे सरकार को पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ाने का कानूनी आधार मिल गया है।

कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी राहत
यदि सरकार कानूनी राय के अनुरूप कार्रवाई करती है तो करीब दो लाख कर्मचारियों की वर्षों से रुकी पदोन्नति प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। हालांकि, सभी पदोन्नतियां हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

 

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मोबाइल नंबर बिना WhatsApp इस्तेमाल होगा आसान, नए फीचर की करेगी सरकार समीक्षा। https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-whatsapp-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%ae/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-whatsapp-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%ae/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:12 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%b2-%e0%a4%a8%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be-whatsapp-%e0%a4%87%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%ae/ मोबाइल-नंबर-बिना-whatsapp-इस्तेमाल-होगा-आसान,-नए-फीचर-की-करेगी-सरकार-समीक्षा।

अगर आप जल्द ही अपना मोबाइल नंबर बताए बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए WhatsApp इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. WhatsApp जल्द ही ऐसा बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिससे लोग फोन नंबर शेयर किए बिना एक-दूसरे से जुड़सकेंगे. हालांकि इस नए फीचर ने भारत […]]]>
मोबाइल-नंबर-बिना-whatsapp-इस्तेमाल-होगा-आसान,-नए-फीचर-की-करेगी-सरकार-समीक्षा।

अगर आप जल्द ही अपना मोबाइल नंबर बताए बिना सिर्फ यूजरनेम के जरिए WhatsApp इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है. WhatsApp जल्द ही ऐसा बड़ा बदलाव करने जा रहा है, जिससे लोग फोन नंबर शेयर किए बिना एक-दूसरे से जुड़सकेंगे. हालांकि इस नए फीचर ने भारत सरकार का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार इस फीचर की गहराई से समीक्षा करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इससे साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के नए रास्ते न खुल जाएं. अगर जांच में कोई गंभीर खामी सामने आती है, तो Meta से जवाब भी मांगा जा सकता है.

WhatsApp का नया यूजरनेम फीचर क्या है?
व्हाट्सऐप एक नया यूजरनेम सिस्टम ला रहा है, जिसके बाद यूजर्स अपनी पहचान के लिए मोबाइल नंबर की जगह एक यूनिक यूजरनेम का इस्तेमाल कर सकेंगे. इसका मकसद लोगों की प्राइवेसी बढ़ाना है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां किसी अनजान व्यक्ति या ग्रुप के साथ बातचीत करनी होती है.

कंपनी के अनुसार, यूजरनेम बनाना पूरी तरह वैकल्पिक होगा. यूजर चाहें तो बाद में अपना यूजरनेम बदल भी सकेंगे या हटा भी सकेंगे. शुरुआत में यह सुविधा धीरे-धीरे सभी यूजर्स तक पहुंचाई जाएगी.

सरकार क्यों कर रही है इस फीचर की समीक्षा?
भारत में पिछले कुछ वर्षों में WhatsApp के जरिए होने वाले ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर स्कैम के मामलों में तेजी आई है. ऐसे में सरकार यह समझना चाहती है कि मोबाइल नंबर छिपने के बाद कहीं अपराधियों के लिए फर्जी पहचान बनाना और आसान तो नहीं हो जाएगा.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि WhatsApp ने फर्जी अकाउंट, पहचान की नकल (Impersonation) और साइबर अपराध रोकने के लिए कितनी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है. यदि समीक्षा के दौरान कोई गंभीर कमी मिलती है, तो Meta को नोटिस जारी किया जा सकता है.

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
WhatsApp के अनुसार, यूजरनेम 3 से 35 कैरेक्टर तक का हो सकेगा. कुछ बड़े सार्वजनिक व्यक्तियों और मशहूर हस्तियों के नाम सुरक्षित रखे जाएंगे ताकि कोई दूसरा उनका गलत इस्तेमाल न कर सके.

इसके अलावा कंपनी एक वैकल्पिक “यूजरनेम की” भी उपलब्ध कराने की योजना बना रही है. यह एक छोटा न्यूमेरिक कोड होगा, जिसे यूजर अपने भरोसेमंद लोगों के साथ साझा कर सकेंगे. इसका उद्देश्य फर्जी अकाउंट और नाम की नकल करने वालों से अतिरिक्त सुरक्षा देना है.

Meta यह भी कहता है कि एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन पहले की तरह जारी रहेगा और निजी संदेश सुरक्षित रहेंगे.

चिंता किस बात की है?
डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर जहां प्राइवेसी बढ़ाएगा, वहीं साइबर अपराधियों को भी नया मौका दे सकता है. यदि कोई ठग किसी मशहूर व्यक्ति, बैंक, कंपनी या सरकारी संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बना ले, तो लोगों को धोखा देना आसान हो सकता है.

कुछ विशेषज्ञों ने Telegram का उदाहरण भी दिया है, जहां यूजरनेम आधारित सिस्टम का फायदा उठाकर कई फर्जी अकाउंट बनाए गए और लोगों से ठगी की गई. उनका मानना है कि भारत जैसे बड़े WhatsApp बाजार में मजबूत एंटी-फ्रॉड सिस्टम बेहद जरूरी होंगे.

आम यूजर्स पर क्या पड़ेगा असर?
अगर यह फीचर सुरक्षित तरीके से लागू होता है, तो यूजर्स को कई फायदे मिल सकते हैं. ग्रुप चैट, बिजनेस बातचीत और नए लोगों से संपर्क करते समय मोबाइल नंबर छिपा रहेगा, जिससे प्राइवेसी बेहतर होगी.

लेकिन यूजर्स को भी सतर्क रहने की जरूरत होगी. किसी अनजान यूजरनेम से आए मैसेज पर भरोसा करने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना जरूरी होगा. संदिग्ध अकाउंट मिलने पर तुरंत ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सलाह दी जाती है.

 

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केतन अग्रवाल मर्डर केस में नया ट्विस्ट, पुणे पुलिस को किस बात का है डर? 27 गुण मिलने के बाद हुई थी शादी https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87/ https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87/#respond Wed, 01 Jul 2026 14:20:11 +0000 https://news.newspaperhost.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%87/ केतन-अग्रवाल-मर्डर-केस-में-नया-ट्विस्ट,-पुणे-पुलिस-को-किस-बात-का-है-डर?-27-गुण-मिलने-के-बाद-हुई-थी-शादी

 पुणे  पुणे केतन अग्रवाल मर्डर मामला एक मिस्ट्री बनता जा रहा है. राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह ही इसमें भी एक के बाद एक ट्विस्ट सामने आ रहे हैं. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सिया गोयल के सोनम रघुवंशी से भी ज्यादा शातिर होने की आशंका हो रही है. पुणे पुलिस के सामने चुनौती […]]]>
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 पुणे 

पुणे केतन अग्रवाल मर्डर मामला एक मिस्ट्री बनता जा रहा है. राजा रघुवंशी हत्याकांड की तरह ही इसमें भी एक के बाद एक ट्विस्ट सामने आ रहे हैं. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सिया गोयल के सोनम रघुवंशी से भी ज्यादा शातिर होने की आशंका हो रही है. पुणे पुलिस के सामने चुनौती बनते जा रहे इस मामले में डर भी सता रहा है, यही वजह है कि पुलिस अब फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। 

जांच अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल केतन अग्रवाल मर्डर केस पूरी तरह परिस्थितिजन्य सबूतों (circumstantial evidence) पर टिका हुआ है. इतने दिन की जांच के बाद भी पुलिस के हाथ कोई सीधा सुराग नहीं लगा है जिससे केतन की हत्या के आरोपी का साफ-साफ पता चल सके. लिहाजा पुलिस हर छोटे-बड़े सबूत को जोड़कर देख रही है और साबित करने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों ने ही हत्या की है और इसमें कोई शक नहीं बचता। 

बता दें कि पुणे ग्रामीण पुलिस इस मामले में बेहद सावधानी से चार्जशीट तैयार कर रही है. पुलिस नहीं चाहती कि सोनम रघुवंशी मामले की तरह कोई कानूनी या प्रक्रिया संबंधी गलती हो, जिससे आरोपी को राहत मिल जाए और पीड़ित की न्याय की आवाज दब जाए। 

यही वजह है कि पुलिस मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराना चाहती है. हालांकि भारत में पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट सीधे कोर्ट में सबूत के तौर पर मान्य नहीं होती. लेकिन पुलिस का मानना है कि इससे कई नए सुराग मिल सकते हैं और असल सबूतों तक पहुंचने का रास्ता साफ हो सकता है। 

पुलिस मानती है कि पूछताछ के दौरान संभव है कि सिया अनजाने में कोई ऐसा क्लू बता दे जो आगे की जांच को बढ़ा दे और आरोपी तक पहुंचा दे. पुलिस यह देखना चाहती है कि क्या उसने पहले लोहागढ़ किले की ऊंचाई गूगल पर सर्च की थी, या फोन में कोई ऐसी डिजिटल गतिविधि की थी जिसके बारे में पुलिस को अभी पता नहीं है, तो पुलिस बाद में उस डिजिटल सबूत जैसे ब्राउज़र हिस्ट्री, लोकेशन डेटा या डिलीटेड सर्च को कानूनी तरीके से जुटा सकती है. ऐसे डिजिटल सबूत कोर्ट में मान्य भी हो सकते हैं। 

फिलहान पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है. ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसने सिया और चेतन को केतन को पहाड़ी से धक्का देते देखा हो. इसके अलावा घटना का कोई CCTV फुटेज भी नहीं मिला है. लिहाजा यह मामला जटिल हो गया है। 

जो CCTV फुटेज मिला है, उसमें सिर्फ सह-आरोपी चेतन चौधरी घटनास्थल के पास हूडी पहने नजर आता है. लेकिन सिर्फ इससे हत्या साबित नहीं होती। 

27 गुण मिलने पर तय हुई थी सिया और केतन की शादी

गोयल और अग्रवाल परिवार  ने इस रिश्ते को ‘परफेक्ट मैच’ माना था. कुंडली मिलाई गई, 27 गुण मिले, परिवार के ज्योतिषी ने इसे सफल और आदर्श विवाह बताया और फिर पूरे रीति-रिवाज के साथ सगाई भी हो गई. लेकिन कुछ ही महीनों बाद वही रिश्ता अब देश के सबसे चर्चित हत्या मामलों में बदल चुका है और घर-घर इसी की चर्चा हो रही है। 

परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में केतन अग्रवाल और सिया गोयल का रिश्ता आगे बढ़ाने से पहले दोनों परिवारों ने पारंपरिक तरीके से कुंडली मिलवाई थी. इसके लिए परिवार के ज्योतिषी को बुलाया गया था. बताया गया कि दोनों की कुंडलियों में 36 में से 27 गुण मिले थे, जिसे विवाह के लिए अच्छा माना गया. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, केतन का ‘देव गण’ और सिया का ‘मनुष्य गण’ बताया गया था. परिवार के ज्योतिषी ने इसे अनुकूल संबंध बताते हुए कहा था कि यह विवाह सफल हो सकता है. इसी के बाद दोनों परिवारों ने रिश्ते को अंतिम रूप दिया। 

 रिश्ते की शुरुआत, फिर बदला माहौल
पुलिस जांच के अनुसार, फरवरी में पुणे के एक होटल में दोनों की सगाई हुई. शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था. दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुट गए और नवंबर 2026 में विवाह की योजना बनाई गई. इसी बीच पुलिस सूत्रों का दावा है कि सगाई के बाद करीब दो महीने तक सिया ने नए रिश्ते को अपनाने की कोशिश की. हालांकि बाद में चेतन चौधरी फिर से उसकी जिंदगी में आया और यहीं से परिस्थितियां बदलने लगीं. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरानहत्या की साजिश बनी. हालांकि अभी इन सभी आरोपों की पुष्टि  होना बाकी है। 

सिया के भाई साहिल गोयल ने क्या बताया
सिया के भाई साहिल गोयल ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उसे इस बात की जानकारी थी कि सिया और चेतन एक-दूसरे को जानते थे और दोस्त थे. हालांकि उसके अनुसार, सगाई के बाद सिया बार-बार यही कहती थी कि अब उसका चेतन से कोई संपर्क नहीं है.  जांच के दौरान केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे ने शादी तय होने के बाद कई बार सिया के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी.  पुलिस की जांच के अनुसार, केतन ने परिवार से पूछा था कि क्या सिया के बारे में पूरी तरह जानकारी लेने के बाद ही रिश्ता तय किया गया है. उसने यह भी बताया था कि कई बार जब वह सिया को फोन करता था तो उसका फोन व्यस्त मिलता था. बातचीत के दौरान सिया अक्सर चेतन चौधरी का नाम भी लेती थी, जिससे उसके मन में संदेह पैदा हुआ. हालांकि परिवार ने उसे समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है क्योंकि दोनों परिवार एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। 

क्राइम सीन भी किया रीक्रिएट
पुलिस ने घटना को समझने के लिए डमी (नकली शरीर) से क्राइम सीन रीक्रिएट भी किया, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इसकी कानूनी अहमियत बहुत कम है. डमी कैसे गिरेगी, यह उसके वजन, एंगल और स्पीड पर निर्भर करता है. इससे यह साबित नहीं किया जा सकता कि व्यक्ति को धक्का दिया गया था या वह खुद फिसल गया। 

इसलिए अभियोजन पक्ष अब मोटिव (हत्या की वजह) और डिजिटल सबूतों पर ज्यादा भरोसा कर रहा है. पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची, क्योंकि सिया कथित तौर पर केतन से शादी नहीं करना चाहती थी। 

जांच एजेंसियां अब मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट सर्च हिस्ट्री और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत खंगाल रही हैं ताकि हत्या की पहले से बनाई गई योजना साबित की जा सके। 

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर सबूतों की इस कड़ी में एक भी महत्वपूर्ण लिंक टूट गया, तो पूरा केस कमजोर पड़ सकता है और आरोपियों को फायदा मिल सकता है। 

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