desh – My Blog https://news.newspaperhost.com My WordPress Blog Wed, 15 Jul 2026 09:35:00 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.1 यूक्रेन युद्ध पर बड़ा दावा, ‘PM मोदी ने पुतिन को परमाणु हमले से रोका’ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b5/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b5/#respond Wed, 15 Jul 2026 09:35:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a8-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%b5/ यूक्रेन-युद्ध-पर-बड़ा-दावा,-‘pm-मोदी-ने-पुतिन-को-परमाणु-हमले-से-रोका’

नई दिल्ली दिल्ली में भारत-पोलैंड जॉइंट इकोनॉमिक कमिशन की बैठक हुई. इसके बाद पोलैंड के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर व्लादिस्लाव तेओफिल बारतोशेव्स्की ने कहा कि प्रधानमंत्री […]

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यूक्रेन-युद्ध-पर-बड़ा-दावा,-‘pm-मोदी-ने-पुतिन-को-परमाणु-हमले-से-रोका’

नई दिल्ली

दिल्ली में भारत-पोलैंड जॉइंट इकोनॉमिक कमिशन की बैठक हुई. इसके बाद पोलैंड के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर व्लादिस्लाव तेओफिल बारतोशेव्स्की ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जिनकी सलाह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गंभीरता से लेते हैं। 

बारतोशेव्स्की ने कहा कि भारत के रूस और पहले सोवियत संघ से दशकों पुराने रिश्ते रहे हैं. यही वजह है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पीएम मोदी की बात को गंभीरता से सुनते और उस पर ध्यान देते हैं. उन्होंने आगे दावा किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध के सबसे अहम दौर में भी प्रधानमंत्री मोदी का यह प्रभाव साफ नजर आया था। 

रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने में प्रभाव
पोलिश नेता ने कहा कि पीएम मोदी रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अपना प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी उन गिने-चुने लोगों में से एक हैं जो वास्तव में राष्ट्रपति पुतिन पर कुछ दबाव और प्रभाव डाल सकते हैं। भारत इस संघर्ष को रोकने के लिए ऐसा कर सकता है। उन्होंने कहा कि भारत एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में रूस और पूर्व सोवियत संघ के साथ लंबे समय से संबंध बनाए हुए है।

पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का रुख
पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत के रुख को सही बताते हुए बार्टोशेवस्की ने कहा कि भारत एक बड़ा और महत्वपूर्ण देश है। भारत को तेल सहित वस्तुओं के मुक्त प्रवाह से लाभ होता है। भारत खाड़ी देशों से आने वाले तेल और गैस पर बहुत निर्भर है। पोलैंड भी ईरान के संपर्क में है और कूटनीतिक समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि हम भी पीएम मोदी की तरह ही समझदारी से बात करने की कोशिश कर रहे हैं। 

रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने में मदद कर सकता है भारत
बारतोशेव्स्की ने कहा कि मैंने बताया था कि 2022 के आखिर में मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से रोकने में अहम भूमिका निभाई थी. मोदी उन गिने-चुने नेताओं में हैं, जो पुतिन पर प्रभाव डाल सकते हैं. भारत चाहे तो इस प्रभाव का इस्तेमाल कर रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने में मदद कर सकता है। 

भारत-रूस के पुराने रिश्तों का असर
भारत-पोलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक के बाद नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बार्टोशेव्स्की ने कहा कि भारत और रूस (पहले सोवियत संघ) के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंध हैं. इसी वजह से राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह को महत्व देते हैं. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी एक सम्मानित वैश्विक नेता हैं और उनकी बात का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर होता है। 

‘आज का युग युद्ध का नहीं’
बार्टोशेव्स्की के बयान के बाद एक बार फिर सितंबर 2022 की वह मुलाकात चर्चा में आ गई, जब उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है.’ इस बयान की उस समय दुनियाभर में काफी चर्चा हुई थी। 

भारत ने हमेशा बातचीत पर दिया जोर
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की बात करता रहा है. भारत ने रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार किया और दोनों पक्षों के साथ अपने संबंध बनाए रखे. प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों से लगातार बातचीत की. वह 2024 में कीव भी गए और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जेलेंस्की से मुलाकात की। 

रूस से तेल खरीद पर कायम रहा भारत
अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी. भारत का कहना है कि यह फैसला देश की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर लिया गया है. वहीं, पिछले महीने राष्ट्रपति पुतिन ने भारत को ‘महान देश’ बताते हुए उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना भी की थी। 

ईरान को लेकर भी भारत की नीति की तारीफ
बार्टोशेव्स्की ने ईरान को लेकर भारत के रुख की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि भारत ने तनाव कम करने, बातचीत और कूटनीतिक समाधान का समर्थन किया है. उन्होंने बताया कि पोलैंड भी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए है और वह भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है. उनके मुताबिक, इस मामले में पोलैंड और भारत की सोच काफी हद तक एक जैसी है। 

सितंबर 2022 में पीएम मोदी और पुतिन की हुई थी मुलाकात
बारतोशेव्स्की के इस बयान के बाद एक बार फिर यूक्रेन युद्ध में प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक भूमिका चर्चा में आ गई है. सितंबर 2022 में उज्बेकिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी ने पुतिन से कहा था कि आज का युग युद्ध का नहीं है. इस बयान को दुनिया भर में काफी अहम माना गया था। 

जहां, भारत ने रूस पर वेस्टर्न कंट्रीज के प्रतिबंधों का समर्थन नहीं किया. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों से लगातार संपर्क बनाए रखा. 2024 में मोदी कीव भी गए और कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान जेलेंस्की से मुलाकात की। 

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India-UK FTA आज से लागू, 99% सामानों पर जीरो टैरिफ समेत मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/india-uk-fta-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%82-99-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%80/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/india-uk-fta-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%82-99-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%80/#respond Wed, 15 Jul 2026 08:35:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/india-uk-fta-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a5%82-99-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%80/ india-uk-fta-आज-से-लागू,-99%-सामानों-पर-जीरो-टैरिफ-समेत-मिलेंगे-ये-5-बड़े-फायदे

नई दिल्ली भारत और ब्रिटेन के लिए बुधवार का दिन बड़ा है, क्योंकि दोनों देशों फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) 15 जुलाई से प्रभावी होने […]

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नई दिल्ली

भारत और ब्रिटेन के लिए बुधवार का दिन बड़ा है, क्योंकि दोनों देशों फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK FTA) 15 जुलाई से प्रभावी होने जा रहा है. ये व्यापार समझौता भारत के लिए बेहद खास है, क्योंकि इससे देश के करीब 99% निर्यात को ब्रिटेन जैसे बड़े बाजार में ड्यूटी-फ्री यानी जीरो टैरिफ (Zero Tariff) एंट्री मिलेगी. इसके साथ ही ये एफटीए दोनों देशों की इकोनॉमी के लिए भी बूस्टर का काम करेगा. आइए जानते हैं इससे भारत को होने वाले 5 बड़े फायदे क्या हैं? 

India-UK इकोनॉमी को बूस्ट
जहां एक ओर दुनिया मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-ईरान जंग में उलझी हुई है, तो वहीं भारत-ब्रिटेन के बीच बड़ी डील लागू हो रही है. India-UK Deal को लेकर दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि इससे इकोनॉमी पर बड़ा असर होगा। 

जहां एक ओर ब्रिटिश सरकार इसे भारत के साथ किया गया सबसे बड़ा ट्रेड एग्रीमेंट बताती है और उसका मानना है कि भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ब्रिटिश अर्थव्यवस्था (UK Economy) में 4.8 अरब पाउंड का इजाफा होगा और वास्तविक वेतन में 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि देखने को मिलेगी. तो वहीं दूसरी ओर भारत सरकार का कहना है कि इस डील से भारतीय निर्यात को जोरदार बढ़ावा मिलेगा. यानी ये FTA दोनों देशों की इकोनॉमी के लिए एक बूस्टर साबित होने वाला है। 

भारत को FTA से क्या-क्या फायदे? 
ब्रिटेन के साथ भारत का ये फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कई मायनों में भारतीय निर्यात और भारतीय कामगारों के लिए फायदे का सौदा साबित होने वाला है. ब्रिटेन से आनी वाली स्कॉच-व्हिस्की से लेकर सुपर लग्जरी कारें सस्ती होंगी, तो भारत को एक बड़ा बाजार मिलने वाला है। 

पहला फायदा: भारत में UK की चीजें सस्ती
विदेश व्यापार महानिदेशालय (Directorate General of Foreign Trade) द्वारा भारत-ब्रिटेन एफटीए को लेकर जारी किए गए एक नोटिफिकेशन को देखें, तो UK-India FTA लागू होने पर भारत में ब्रिटिश स्‍कॉच-व्हिस्‍की पर लागू 150% टैरिफ कई किस्‍तों में कट करके 40% लाया जाएगा. यानी इसकी कीमत में 110% की कमी आएगी. इसके अलावा ऑटोमोबाइल टैरिफ 100% से घटाकर सिर्फ 10% कर दिया जाएगा. इससे लैंड रोवर, जुगआर, Rolls Royce और एस्‍टन मार्टिन, डिफेंडर जैसी कारें सस्‍ती कीमतों पर मिल सकेंगी. ब्रिटिश ब्यूटी प्रोडक्ट्स पर 22% टैरिफ कम या खत्म होगा। 

दूसरा फायदा: भारत का 99% सामान ड्यूटी फ्री
भारत-UK एफटीए भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में ड्यूटी फ्री एक्सेस मिल सकेगी. इनमें कपड़े, जूते और कुछ फूड प्रोडक्ट्स शामिल हैं. टेक्सटाइल गारमेंट पर यूके में 12% की ड्यूटी लगती है. केमिकल्‍स पर 8 फीसदी, बेस मेटल्‍स पर 10 फीसदी की ड्यूटी लगती है, लेकिन अब इस डील से 99 फीसदी वस्‍तुएं यूके में ‘0%’ के तहत आएंगी। 

तीसरा फायदा: निर्यात के साथ रोजगार के अवसर
भारत-ब्रिटेन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का अगला बढ़ा फायदा रोजगार पर देखने को मिलेगा. दरअसल, ब्रिटिश बाजार में भारत के निर्यात पर जीरो या कम टैरिफ पर एंट्री से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा. इससे श्रम-प्रधान उद्योगों में उत्पादन बढ़ेगा. खासतौर पर कपड़ा, चमड़ा, फूड प्रोसेसिंग और MSMEs सेक्टर में लाखों नए रोजगार बनेंगे। 

चौथा फायदा: पेशेवरों को नेशनल इंश्योरेंस छूट
भारत-ब्रिटेन के बीच हुए इस समझौते से ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को भी बड़ा फायदा मिलेगा. दरअसल,  FTA में ‘डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन’ (DCC) के तहत ब्रिटेन में कार्यरक भारतीयों को नेशनल इंश्योरेंस में छूट प्रस्तावित है. बीते दिनों केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया था कि यूके में भारतीय पेशेवरों के वेतन का करीब 25% हिस्सा ब्रिटेन सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना में जाता था, लेकिन अब यह पैसा भारत में उनके भविष्य निधि खाते (PF Account) में जमा होगी, जिस पर 8.25% सालाना ब्याज मिलेगा. यह पूरा पैसा टैक्स फ्री होगा। 

पांचवां फायदा: निवेश को मिलेगा बढ़ावा
FTA के लागू होने से जहां भारत और ब्रिटेन दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, तो वहीं निवेश में उछाल आने की भी उम्मीद है. UK की कंपनियां भारत में अधिक निवेश कर सकती हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा भारतीय आईटी कंपनियों, इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स समेत अन्य प्रोफेशनल्स के लिए ब्रिटेन में मौके बढ़ेंगे। 

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E20 नहीं चाहिए? ज्यादा कीमत देकर खरीद सकेंगे 100% पेट्रोल, नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/e20-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%87/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/e20-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%87/#respond Wed, 15 Jul 2026 07:33:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/e20-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%a4-%e0%a4%a6%e0%a5%87/ e20-नहीं-चाहिए?-ज्यादा-कीमत-देकर-खरीद-सकेंगे-100%-पेट्रोल,-नितिन-गडकरी-का-बड़ा-ऐलान

 नई दिल्ली E20 यानी एथनॉल मिले हुए पेट्रोल को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि […]

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 नई दिल्ली

E20 यानी एथनॉल मिले हुए पेट्रोल को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि लोग चाहें तो पेट्रोल पंप पर 100 फीसदी पेट्रोल भी ले सकते हैं, लेकिन इसे लिए उन्हें ज्यादा पैसे देने होंगे। वह इससे पहले भी कह चुके हैं कि एथनॉल मिले हुए ईंधन के चलते वाहन खराब होने की समस्या नहीं आई है। खबरें हैं कि तेल कंपनियों ने ईंधन की क्वालिटी की जांच तेज कर दी है।

 बातचीत में गडकरी से पूछा गया कि क्या पेट्रोल पंप पर ई10 ईंधन के विकल्प की संभावनाएं हैं। इसपर उन्होंने जवाब दिया कि जब हमने 20 फीसदी एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया और E20 ईंधन देश के हर फ्यूल स्टेशन पर है, तो ऐसा कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि जो लोग एथनॉल मिला हुआ पेट्रोल नहीं चाहते हैं, वो 100 फीसदी पेट्रोल खरीद सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें ज्यादा पैसा देना होगा।

पेट्रोल कंपनियों ने शुरू की जांच
सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने देश भर में अपने रिटेल पंप पर ईंधन गुणवत्ता की जांच तेज कर दी है। इनमें इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का नाम शामिल है। इन कंपनियों ने ये कदम सोशल मीडिया पर ईंधन की गुणवत्ता को लेकर प्रसारित हो रहीं चिंताओं के बीच ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए उठाएं हैं।

इन पेट्रोलियम कंपनियों ने ग्राहकों से अपील की है कि वे ईंधन गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी शिकायत को सीधे पेट्रोल पंप या कंपनी के ग्राहक सेवा माध्यमों से दर्ज कराएं और अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें।

E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित
E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन खराब होने और माइलेज घटने की बात को नितिन गडकरी ने सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि ई-20 पेट्रोल को लेकर उपजा पूरा विवाद राजनीतिक रूप से प्रेरित है और सरकार को निशाना बनाने के लिए भ्रामक जानकारियां फैलाई जा रही हैं। 

गडकरी ने दावा किया कि E20 ईंधन को पूरी तरह टेस्टिंग के बाद ही बाजार में उतारा गया है. E10 पर चलने वाली सभी गाड़ियां E20 के लिए पूरी तरह सही हैं. आज तक एक भी ऐसा मामला नहीं आया जहां E20 से किसी गाड़ी का इंजन खराब हुआ हो. मारुति सुजुकी जैसी बड़ी कंपनी भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है. उन्‍होंने कहा कि जल्द ही बाजार में फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियां (FFV) आने वाली हैं. इनके लिए कुछ पंपों पर E85 (85% एथेनॉल मिक्स) पेट्रोल भी मिलने लगा है। 

IIT कानपुर का बड़ा दावा
IIT कानपुर का कहना है कि E20 से गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंचने के कोई सबूत नहीं हैं। आईआईटी-कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में इंजन रिसर्च लैबोरेटरी के परियोजना वैज्ञानिक ध्रुव राज करणा ने मंगलवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि बड़े पैमाने पर हुए अध्ययन में सामने आया कि ई-20 से इंजन को नुकसान, जंग लगने या कोई दूसरी तकनीकी समस्या नहीं होती है।

माइलेज पर भी असर?
उन्होंने कहा, ‘संस्थान के अध्ययनों में ई-20 के कारण गाड़ियों के ‘माइलेज’ में कोई खास कमी नहीं पाई गई। ‘माइलेज’ में कोई भी बदलाव दरअसल ईंधन के बजाय गाड़ी चलाने की आदतों, सड़क की स्थिति और गाड़ी के रखरखाव से ज्यादा प्रभावित होता है।’ शोधकर्ताओं के मुताबिक अब तक किए गए परीक्षणों में इंजन के टिकाऊपन या गाड़ी की रफ्तार और माइलेज पर ई20 ईंधन का कोई गलत असर नहीं देखा गया है।

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थ्री लैंग्वेज पॉलिसी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, पूछा- क्या अंग्रेज़ी अब हमारी अपनी भाषा बन चुकी है? https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/#respond Wed, 15 Jul 2026 07:31:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%a5%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%b8/ थ्री-लैंग्वेज-पॉलिसी-पर-सुप्रीम-कोर्ट-की-टिप्पणी,-पूछा-क्या-अंग्रेज़ी-अब-हमारी-अपनी-भाषा-बन-चुकी-है?

नई दिल्ली क्या इंग्लिश भी भारत की ही भाषा बन चुकी है? यह सवाल का जवाब कई लोगों के पास नहीं होगा और न ही […]

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नई दिल्ली

क्या इंग्लिश भी भारत की ही भाषा बन चुकी है? यह सवाल का जवाब कई लोगों के पास नहीं होगा और न ही कोई आम आदमी यह सवाल कर रहा है. CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल किया है, जिसके बाद से एक नई बहस छिड़ गई है. दरअसल, कक्षा 6 से लागू होने वाली बोर्ड की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर कोर्ट में बहस चल रही थी. इस दौरान कोर्ट ने कुछ ऐसा सवाल उठाया जिसने छात्रों और अभिभावकों के साथ सिस्टम का भी ध्यान खींच लिया है. कोर्ट ने कहा कि क्या अंग्रेजी को भी भारत की स्थानीय भाषा माना जा सकता है. उनका यह सवाल इसलिए भी बेहद अहम था क्योंकि आजकल भारतीय युवा का करियर और जॉब मार्केट अंग्रेजी के इर्द-गिर्द घूम रहा है. कई राज्यों में लोग इंग्लिश ही बोलते हैं, तो चलिए समझते हैं कोर्ट की इस टिप्पणी का एजुकेशन सिस्टम से क्या कनेक्शन है। 

क्यों हो रहा है विवाद? 
बता दें कि CBSE की थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर विवाद तब से हो रहा है जब से बोर्ड ने इसका ऐलान किया है. नई शिक्षा नीति के तहत बोर्ड चाहता है कि बच्चे अंग्रेजी के अलावा हिंदी समेत अन्य भाषाएं सीखें. इसे ही बढ़ावा देने के लिए बोर्ड ने कक्षा 6 से तीन भाषाओं को पढ़ने का नियम बनाया था. इसका मकसद भारतीय भाषाओं को बचाना और बच्चों को बहुभाषी बनाना है. लेकिन इसके ऐलान के साथ ही छात्रों और अभिभावकों के बीच नई चिंता पैदा हो गई थी कि अगर बच्चा अचानक से एक नई भाषा पढ़ता है, तो उसपर बोझ बढ़ जाएगा। 

अब कोर्ट के बयान ने खींचा ध्यान 
सुनवाई के दौरान कोर्ट के वकीलों ने दलील दी कि भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं को बढ़ावा मिलना चाहिए. इसके बाद से कोर्ट ने कहा कि आज भारत का दूसरा सबसे बड़ा अंग्रेजी बोलने वाला देश बन गया है. नागालैंड और मेघालय जैसे राज्यों की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है. सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट हर काम इंग्लिश में ही होता है. ऐसे में इसे पूरी तरह से विदेशी कहकर किनारे नहीं किया जा सकता। 

3 भाषाओं की किताबें हैं मौजूद 
इस दौरान कोर्ट ने एक और बात उजागर की है. वैसे तो कागजों पर 22 भारतीय भाषाओं में से कोई भी चुनने की आजादी दी गई है लेकिन सच तो ये है कि NCERT की वेबसाइट पर अब भी केवल 3 भाषाओं की किताबें मौजूद हैं। 

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रेप की कोशिश पर HC के फैसले से सुप्रीम कोर्ट नाराज़, महिला सुरक्षा को लेकर उठाए कड़े सवाल https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-hc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-hc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87/#respond Wed, 15 Jul 2026 07:22:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%aa-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-hc-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ab%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87/ रेप-की-कोशिश-पर-hc-के-फैसले-से-सुप्रीम-कोर्ट-नाराज़,-महिला-सुरक्षा-को-लेकर-उठाए-कड़े-सवाल

नई दिल्ली देशभर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में जजों की संवेदनहीनता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। […]

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नई दिल्ली

देशभर में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामलों में जजों की संवेदनहीनता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई, जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि ‘महिला की सलवार उतारना और उसका ब्रेस्ट दबाना, रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता।’

इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस तरह का ही एक फैसला सुनाया था। इन मामलों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अदालतों में जजों में संवेदनशीलता की कमी पर चिंता जताई। पीठ ने कहा कि जजों की यह जिम्मेदारी है कि वे फैसला सुनाने से पहले रिसर्च करें।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी अदालतों के लिए गाइडलाइंस जारी की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता पर बनी नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी कमेटी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट और देश के सभी हाई कोर्ट्स की वेबसाइटों पर तुरंत अपलोड किया जाए। इसके अलावा राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे सभी पुलिस स्टेशनों को नियमों का पालन करने के निर्देश जारी करें, ताकि एफआईआर दर्ज करते समय और चार्जशीट दाखिल करते समय इन बातों का ध्यान रखा जा सके।

सुनवाई के दौरान जस्टिस वी मोहना ने पूछा कि क्या पटना हाईकोर्ट के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र था? इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “जजों का भी यह कर्तव्य है कि वे कुछ रिसर्च करें। स्टाफ कुछ नहीं कर रहा है।”

पटना हाईकोर्ट का विवादित फैसला
पटना हाईकोर्ट ने बीते 9 जुलाई को ए
क मामले की सुनवाई करते हुए अटेम्प्ट टू रेप के एक आरोपी की सजा को पलट दिया था। अदालत ने कहा कि महिला की सलवार हटाना और उसके ब्रेस्ट को दबाना ‘रेप की कोशिश’ साबित करने के लिए काफी नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई मेडिकल सबूत नहीं है जो स्पष्ट रूप से रेप की कोशिश की गवाही देता हो।

यह मामला बिहार के अमरपुर का था। 2008 में यहां एक युवती अपने पिता के साथ स्टूडियो में फोटो खिंचाने गई थी। आरोप के मुताबिक, फोटो खींचने के बाद स्टूडियो मालिक ने पिता को कंप्यूटर पर फोटो देखने के बहाने बाहर इंतजार करने को कहा। इसके बाद उसने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया और युवती के साथ जबरदस्ती की। लड़की के चिल्लाने पर पिता अंदर गए तो आरोपी वहां से फरार हो गया। इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को रेप के प्रयास का दोषी ठहराया था। हालांकि अब पटना हाईकोर्ट ने फैसला पलट दिया।

इलाहाबाद HC ने भी सुनाया था फैसला
वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि ऐसे फैसले लगातार सामने आ रहे हैं। इससे पहले 17 मार्च 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी ऐसा ही एक आदेश दिया था। इलाहाबाद HC ने कहा था कि लड़की के पजामे का नाड़ा खींचने और ब्रेस्ट दबाने को रेप की कोशिश नहीं माना गया था। इस मामले के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जजों को संवेदनशील बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी।

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इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड में भारत का जलवा, कोटा के छात्रों ने 5 गोल्ड जीतकर बनाया नंबर-1 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%93%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%af/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%93%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%af/#respond Wed, 15 Jul 2026 07:01:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%9f%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%93%e0%a4%b2%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%af/ इंटरनेशनल-फिजिक्स-ओलंपियाड-में-भारत-का-जलवा,-कोटा-के-छात्रों-ने-5-गोल्ड-जीतकर-बनाया-नंबर-1

नई दिल्ली कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड-2026 में भारत ने इतिहास रच दिया है. 87 देशों के बीच भारतीय टीम ने […]

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नई दिल्ली
कोलंबिया के बुकारामांगा में आयोजित 56वें इंटरनेशनल फिजिक्स ओलंपियाड-2026 में भारत ने इतिहास रच दिया है. 87 देशों के बीच भारतीय टीम ने पहला स्थान हासिल किया. सबसे खास बात यह रही कि भारतीय टीम के सभी पांचों छात्रों ने गोल्ड मेडल जीते और इनमें से चार छात्र कोटा कोचिंग से जुड़े रहे. भारतीय टीम में शामिल कनिष्क जैन, रिद्धेश बेंडाले, ऋषित गर्ग, स्वरित जोशी और एक अन्य छात्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को पांचों गोल्ड मेडल दिलाए. इस उपलब्धि के दम पर भारत ने दुनिया के 87 देशों को पीछे छोड़ते हुए रैंक-1 हासिल की। 

छात्रों का बढ़ाया हौसला 
कोटा एलन कोचिंग संस्थान के सीईओ नितिन कुकरेजा ने इसे भारतीय शिक्षा और वैज्ञानिक प्रतिभा के लिए बड़ी उपलब्धि बताया. उनका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में उनके छात्रों का लगातार बेहतर प्रदर्शन देश की बढ़ती शैक्षणिक क्षमता को दर्शाता है. अब तक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में कोटा एलन कोचिंग के छात्र 188 मेडल जीत चुके हैं, जिनमें 90 गोल्ड, 75 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज शामिल हैं। 

चार चरणों में हुआ था छात्रों का चयन 
इस प्रतियोगिता के लिए छात्रों का चयन चार चरणों में हुआ. पहले राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा, फिर इंडियन नेशनल फिजिक्स ओलंपियाड, उसके बाद ओरिएंटेशन-कम-सेलेक्शन कैंप और अंत में भारत की पांच सदस्यीय टीम का चयन किया गया. अंतिम मुकाबले में 87 देशों के 381 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। 

गोल्ड मेडल विजेता कनिष्क जैन ने कहा कि कोटा में मिली शैक्षणिक तैयारी और मार्गदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में बेहद काम आया. वहीं, रिद्धेश बेंडाले और ऋषित गर्ग ने भी इस सफलता का श्रेय अपनी तैयारी और देश का प्रतिनिधित्व करने के अवसर को दिया. कक्षा 11 के छात्र स्वरित जोशी ने कहा कि सही समय पर शुरू की गई तैयारी बड़े मंच पर सफलता दिलाती है। 

भारत का विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन 
भारत के छात्रों ने 56वें अंतर्राष्ट्रीय फिजिक्स ओलंपियाड (IPhO) में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर देश का नाम रोशन किया. होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) के अनुसार, भारतीय छात्रों ने सैद्धांतिक परीक्षा में लगभग पूरे अंक हासिल किए, जबकि व्यावहारिक परीक्षा में भी उनका प्रदर्शन बेहतरीन रहा. बता दें कि यह प्रतियोगिता में भारत की 27वीं भागीदारी थी. अब तक भारतीय प्रतिभागियों में से लगभग 44% ने गोल्ड मेडल 41% ने रजत पदक और 10% ने कांस्य पदक जीते हैं। 

पिछले 10 साालों की बात करें, तो ओलंपियाड में शामिल होने वाला हर भारतीय छात्र पदक जीतकर लौटा है. इस दौरान 62% छात्रों ने गोल्ड और 38% ने रजत पदक हासिल किए. खास बात यह है कि भारत ने अब तक केवल दो बार एक ही संस्करण में सभी पांच स्वर्ण पदक जीते हैं, पहली बार 2018 में और दूसरी बार इस साल ही। 

भारत के ओलंपियाड कार्यक्रम का संचालन टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के अंतर्गत आने वाले होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) द्वारा किया जाता है. यही संस्थान राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं, प्रशिक्षण शिविरों और अंतिम पांच सदस्यीय टीम के चयन की पूरी प्रक्रिया संभालता है।  

इस साल भारतीय टीम का नेतृत्व HBCSE-TIFR के प्रोफेसर अन्वेष मजूमदार और सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई की डॉ. लीना जोशी ने किया. वहीं, वैज्ञानिक पर्यवेक्षक के रूप में IISER कोलकाता के प्रोफेसर आनंद दासगुप्ता और गोगटे-जोगलेकर कॉलेज, रत्नागिरी की निशा केलकर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

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पुरी रथ यात्रा: आज श्रीमंदिर के सामने पहुंचेंगे तीनों रथ, कल मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे महाप्रभु जगन्नाथ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6/#respond Wed, 15 Jul 2026 06:53:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%a5-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%9c-%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6/ पुरी-रथ-यात्रा:-आज-श्रीमंदिर-के-सामने-पहुंचेंगे-तीनों-रथ,-कल-मौसीबाड़ी-के-लिए-प्रस्थान-करेंगे-महाप्रभु-जगन्नाथ

भुवनेश्वर  विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी धाम पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। गुरुवार को भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र […]

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पुरी-रथ-यात्रा:-आज-श्रीमंदिर-के-सामने-पहुंचेंगे-तीनों-रथ,-कल-मौसीबाड़ी-के-लिए-प्रस्थान-करेंगे-महाप्रभु-जगन्नाथ

भुवनेश्वर
 विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा को लेकर पुरी धाम पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूब गया है। गुरुवार को भगवान श्रीजगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर श्रीगुंडिचा मंदिर (मौसीबाड़ी) के लिए प्रस्थान करेंगे। 

इससे पहले बुधवार को परंपरागत ‘दक्षिण मोड़’ नीति के तहत तीनों रथों को रथखला से खींचकर श्रीमंदिर के सिंहद्वार के समक्ष लाया जाएगा।

रथ यात्रा के लिए तैयार किए गए तीनों भव्य रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। भगवान बलभद्र के तालध्वज, देवी सुभद्रा के दर्पदलन तथा भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ को अंतिम रूप दे दिया गया है। रथों पर सजावट, ध्वज, पताका और पारंपरिक अलंकरण का कार्य पूरा हो चुका है।

चतुर्धा विग्रह होंगे रथों पर विराजमान
गुरुवार को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक नीतियों के बाद चतुर्धा विग्रहों को पहंडी विजय के माध्यम से श्रीमंदिर से बाहर लाकर रथों पर विराजमान कराया जाएगा। गजपति महाराज द्वारा छेरा पहरा नीति संपन्न किए जाने के बाद रथ खींचने की प्रक्रिया आरंभ होगी।

परंपरा के अनुसार सबसे पहले भगवान बलभद्र के तालध्वज रथ को भक्त खींचेंगे। इसके बाद देवी सुभद्रा के दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ के नंदीघोष रथ को श्रद्धालु खींचकर गुंडिचा मंदिर की ओर ले जाएंगे। लाखों श्रद्धालु इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुंच रहे हैं।

रिमझिम बारिश के बीच उमड़ रही श्रद्धा
रथ यात्रा को लेकर देश-विदेश से श्रद्धालुओं का पुरी पहुंचना लगातार जारी है। रिमझिम बारिश के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख मार्गों पर यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। होटल, धर्मशाला और मठों में भी श्रद्धालुओं की चहल-पहल बढ़ गई है।

सेवा कार्य में जुटे सामाजिक संगठन
रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अनेक सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संगठन सेवा कार्य में जुट गए हैं। विभिन्न स्थानों पर पेयजल, चिकित्सा सहायता, प्राथमिक उपचार, खोया-पाया केंद्र तथा निशुल्क भोजन वितरण की व्यवस्था की गई है। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन में भी प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं।

सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
रथ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। जगन्नाथ धाम को बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रखा गया है। पुलिस, केंद्रीय अर्धसैनिक बल, तटरक्षक बल और विशेष सुरक्षा इकाइयों की तैनाती की गई है।

सुरक्षा एजेंसियां जल, थल और नभ तीनों माध्यमों से निगरानी कर रही हैं। समुद्री तट पर कोस्ट गार्ड और मरीन पुलिस सक्रिय हैं, जबकि ड्रोन रोधी प्रणाली और हवाई निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। शहर के विभिन्न हिस्सों और बड़दांड पर हजारों सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

भक्तों के स्वागत को तैयार पुरी
रथ यात्रा के पावन अवसर पर पूरा पुरी शहर आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर है। बड़दांड पर भक्तों की भीड़, जय जगन्नाथ के उद्घोष, भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण के बीच गुरुवार को भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के बीच निकलेंगे। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा यह महापर्व एक बार फिर विश्व को सनातन संस्कृति और ओडिशा की गौरवशाली परंपरा का संदेश देगा।

 

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LPG-पेट्रोल होंगे महंगे? होर्मुज पर ट्रंप के 20% टैक्स से भारत की बढ़ सकती है मुश्किल https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/lpg-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/lpg-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d/#respond Wed, 15 Jul 2026 05:22:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/lpg-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d/ lpg-पेट्रोल-होंगे-महंगे?-होर्मुज-पर-ट्रंप-के-20%-टैक्स-से-भारत-की-बढ़-सकती-है-मुश्किल

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में नई हलचल मचा दी है. ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट […]

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नई दिल्ली

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान ने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में नई हलचल मचा दी है. ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों पर 20 फीसदी शुल्क लगाने और ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर से शुरू करने की घोषणा की है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. इसका सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात करते हैं. इनमें भारत भी प्रमुख है। 

ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका अब होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहा है, इसलिए इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से 20 फीसदी टैक्स लिया जाएगा. उनके मुताबिक, यह रकम सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए होगी. साथ ही उन्होंने ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू करने का भी ऐलान किया। 

ईरान ने दी सीधी चेतावनी
ट्रंप के फैसले पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है. विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट का असली संरक्षक ईरान है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर सुरक्षा के बदले शुल्क लेना ही है, तो 20 फीसदी बहुत ज्यादा है। 

ईरान के सैन्य नेतृत्व ने इससे भी आगे बढ़कर चेतावनी दी कि होर्मुज के संचालन में किसी भी अमेरिकी दखल को उसकी संप्रभुता पर हमला माना जाएगा और उसका जवाब दिया जाएगा। 

क्या अमेरिका ऐसा कर सकता है?
ट्रंप के ऐलान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं. संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) का कहना है कि किसी अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर एकतरफा अनिवार्य शुल्क लगाने का कोई स्पष्ट कानूनी आधार नहीं है। 

भारत के लिए क्यों बड़ी चिंता की बात?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. सऊदी अरब, इराक, यूएई, कुवैत और कतर से आने वाला ज्यादातर कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) होर्मुज स्ट्रेट से होकर ही भारत पहुंचता है। 

अगर ट्रंप का यह 20 फीसदी शुल्क लागू होता है, तो भारतीय कंपनियों के लिए तेल और गैस खरीदना महंगा हो जाएगा. इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, किराये और रोजमर्रा की महंगाई पर पड़ सकता है। 

भारतीय नाविक भी बने निशाना
ट्रंप के इस बयान से कुछ घंटे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी हिस्से में उसके दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया. इस हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत कुल आठ लोग घायल हुए. चार घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है. इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविक किस तरह बढ़ते संघर्ष के बीच जोखिम उठा रहे हैं। 

महंगे तेल के साथ और भी कई टेंशन
भारत सरकार ने अभी तक इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ा या होर्मुज से जहाजों की आवाजाही और प्रभावित हुई, तो भारत को सिर्फ महंगे तेल का ही नहीं, बल्कि बढ़े हुए शिपिंग चार्ज, बीमा प्रीमियम और सप्लाई चेन में रुकावट जैसी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है। 

यानी, होर्मुज में बढ़ता तनाव सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है. इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आम लोगों की जेब और पूरी अर्थव्यवस्था पर भी महसूस किया जा सकता है। 

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UNSC में 50 साल पहले मिली हार से आज की कूटनीतिक बढ़त तक, भारत के बदले वैश्विक समीकरण की कहानी https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/unsc-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-50-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/unsc-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-50-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86/#respond Wed, 15 Jul 2026 04:51:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/unsc-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-50-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86/ unsc-में-50-साल-पहले-मिली-हार-से-आज-की-कूटनीतिक-बढ़त-तक,-भारत-के-बदले-वैश्विक-समीकरण-की-कहानी

नई दिल्ली इस वक्त भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी दावेदारी मजबूत करने जा रहा है, जो बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य और राजनीति […]

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नई दिल्ली
इस वक्त भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपनी दावेदारी मजबूत करने जा रहा है, जो बदलते हुए वैश्विक परिदृश्य और राजनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. जब दुनिया पश्चिम एशिया तनाव और यूक्रेन युद्ध से जूझ रही है, भारत ने 2028-29 के लिए UNSC के अस्थायी सदस्य पद का चुनाव अभियान आधिकारिक रूप से लॉन्च कर दिया है. साउथ एशिया की अहम धुरी बन चुका भारत आज एक मजबूर स्थिति में है, लेकिन 70 के दशक का वो दौर भी था, जब भारत को पाकिस्तानी कूटनीति के आगे हार माननी पड़ गई थी. दिसंबर 1971 की जीत के बाद भारत, दक्षिण एशिया का बड़ा खिलाड़ी बन चुका था. बांग्लादेश का बनना, पाकिस्तान की सेना की शर्मनाक हार और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती आवाज ने ये उम्मीद पैदा कर दी थी कि अब भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी कम से कम प्रभावी अस्थायी स्थान बना लेगा पर हुआ कुछ अलग ही। 

1975 में, जब UN जनरल असेंबली ने 1976-77 के लिए नॉन-परमानेंट सदस्य चुनने की प्रक्रिया शुरू की, तो एशियाई ग्रुप की एक सीट पर फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी टक्कर हो गई. यहां नतीजा अलग रहा और भारत को रणनीतिक पीछे हटना पड़ा. पाकिस्तान ने उस वक्त ये सीट हासिल कर ली और यह घटना आज भी भारत की कूटनीतिक यादों में एक महत्वपूर्ण सबक के रूप में दर्ज है. खासकर जब भारत 2028-29 के लिए UNSC नॉन-परमानेंट सदस्यता और उसके साथ आने वाली अस्थायी प्रेसिडेंसी के लिए कैंपेन चला रहा है, तो भारत की ये चूक भूली नहीं जा सकती है. हम यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता की ओर जैसे ही देखते हैं, तो 1975 की ये जियोपॉलिटिक्स जेहन में ताजा हो जाती है। 

क्या थे 1975 के हालात?
1971 की जंग के बाद पाकिस्तान टूटा हुआ और अपमानित महसूस कर रहा था. उसके पास परमाणु कार्यक्रम की दिशा में तेजी आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समर्थन सीमित था. वहीं भारत, इंदिरा गांधी के नेतृत्व में नॉन अलाइड मूवमेंट (NAM) में सक्रिय था और विकासशील देशों का चैंपियन बनने की कोशिश कर रहा था. UNSC में अस्थायी सदस्यता के लिए चुनाव हर दो साल में होते हैं. एशिया-पैसिफिक ग्रुप को आमतौर पर दो सीटें मिलती हैं, जिनमें से एक अरब या मुस्लिम देशों और दूसरी अन्य एशियाई देशों के बीच घूमती रहती है. 1975 में, मौजूदा सदस्यों में इराक का कार्यकाल खत्म हो रहा था. जनरल असेंबली के 30वें सत्र में 20-23 अक्टूबर को मतदान हुआ. अन्य क्षेत्रों की सीटें (अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप) पहले ही तय हो चुकी थीं – बेनिन, लीबिया, पनामा और रोमानिया आसानी से चुने गए. अब बची सिर्फ एशियाई सीट, जहां भारत और पाकिस्तान मुख्य दावेदार थे. फिलीपींस ने भी शुरुआत में दावा किया लेकिन बाद में पीछे हट गया। 

8 राउंड चला चुनाव का ड्रामा
इसके लिए चुनाव की प्रक्रिया सरल नहीं थी, जिसमें कुल 8 राउंड हुए. UNGA में दो-तिहाई बहुमत जरूरी था, यानि कुल 140 से ज्यादा सदस्यों में से लगभग 93-94 वोट्स जरूरी थे. पहले राउंड में रोमानिया, दहोमे, पनामा और लीबिया आसानी से चुने गए. एशियाई सीट पर भारत को 60 वोट मिले, पाकिस्तान को 59, फिलीपींस को भी कुछ वोट मिले, जो पर्याप्त नहीं थे. फिर अगले राउंड्स में भी वोटिंग जारी रही. भारत और पाकिस्तान के बीच वोटों का अंतर करीब 10-20 का रहा. कुल 8 राउंड मतदान होने के बाद 23 अक्टूबर तक प्रक्रिया जारी रही. इस दौरान कूटनीतिक गतिविधियां भी चल रही थीं. कई देशों के प्रतिनिधियों ने अपील की कि एक देश पीछे हट जाए ताकि सहमति बन सके. कुवैत के प्रतिनिधि ने खासतौर पर अपील की और भविष्य में समर्थन का आश्वासन दिया. मिस्र, ईरान, अल्जीरिया, ईराक, थाईलैंड, मॉरिशस और अर्जेंटीना जैसे देशों ने भी यही अपील दोहराई और आखिरकार भारत के स्थायी प्रतिनिधि जयपाल ने नाम वापस ले लिया. उन्होंने कहा कि भारत भविष्य के चुनाव में समर्थन की उम्मीद रखता है. इस पर पाकिस्तान के प्रतिनिधि अखुंद ने भारत का शुक्रिया अदा किया और भविष्य में समर्थन का वादा किया. इस तरह आखिरी राउंड में पाकिस्तान को 123 वोट मिले और वह निर्विरोध चुना गया। 

क्यों 1975 में हार गया भारत?
    एशियाई ग्रुप में मुस्लिम और अरब देशों का ब्लॉक उस वक्त पाकिस्तान के पक्ष में मजबूत था. 1970 के दशक में OIC यानि ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन का प्रभाव बढ़ रहा था. कई अफ्रीकी-एशियाई देश भी पाकिस्तान को इस्लामिक सॉलिडैरिटी के नाम पर सपोर्ट कर रहे थे। 

    एक मसला ये भी था कि पाकिस्तान, अमेरिका और चीन के करीब था, जबकि भारत सोवियन यूनियन यानि रूस के साथ था. हालांकि NAM में भारत की स्थिति मजबूत थी, लेकिन UNGA में वोटिंग में कई छोटे देशों ने पाकिस्तान को प्राथमिकता दी।

    ऐसे में भारत ने लंबे संघर्ष से बचने के लिए पीछे हटने को ही बेहतर विकल्प माना. चूंकि 1975 में भारत आर्थिक चुनौतियों और आंतरिक इमरजेंसी से जूझ रहा था, ऐसे में वो UNSC सीट के लिए किसी भी लड़ाई में उलझने से बचना चाहता था। 

    इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी सीख ये था कि सभी देशों की ओर से जो भविष्य के समर्थन की बात कही गई, वो सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता थी, जो कभी नहीं हुआ. ये कदम भारत के लिए बड़ा सेटबैक बनकर उभरा। 

कल की चूक, आज की सीख
भारत अब G4 (भारत, जर्मनी, जापान, ब्राजील) के साथ स्थायी सदस्यता की मांग करता है, लेकिन अस्थायी सीट के लिए भी रोबस्ट कैंपेन जरूरी है. 1975 में भारत ने पीछे हटकर अपनी गरिमा बचाई थी लेकिन आज की स्थिति अलग है. भारत, दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, पीसकीपिंग में सबसे बड़ा सहयोगी है और ग्लोबल साउथ की एक मजबूत आवाज है। 

SHANTI (Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity) जैसी पहल के साथ भारत न सिर्फ सीट जीतने, बल्कि UNSC के सुधार करने का नैरेटिव सेट कर रहा है. 1975 की वो रात UN हॉल में भारत के प्रतिनिधि के पीछे हटने के भाषण ने एक चैप्टर बंद कर दिया था, लेकिन कहानी अब भी जारी है. पाकिस्तान ने 1976-77 में अपनी सदस्यता का इस्तेमाल कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए किया, जबकि भारत ने बाहर रहकर भी अपनी आवाज बनाए रखी. आज भी पाकिस्तान UNSC में है, वो 2025-26 का टर्म, और जुलाई 2025 में प्रेसीडेंसी ले चुका है, ऐसे में भारत को पिछली घटनाओं से सबक से सीखकर, मजबूत गठबंधनों और कूटनीति से आगे बढ़ना है। 

कुल मिलाकर 1975 की हार वाकई हार नहीं, बल्कि एक रणनीतिक स्टॉप थी. आज 50 साल बाद भारत की बढ़ती वैश्विक हैसियत इस बात की गवाही है कि लंबे खेल में जो सही मंसूबे के साथ आगे बढ़ता है, वो जीतता है. UNSC की अस्थायी प्रेसिडेंसी सिर्फ एक कुर्सी नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने का प्लेटफॉर्म है. ऐसे में भारत को अब चूकना नहीं चाहिए। 

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New 10kg LPG Cylinder: जल्द लॉन्च हो सकता है 10 किलो का नया गैस सिलेंडर, जानिए संभावित कीमत https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/new-10kg-lpg-cylinder-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9a-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-10-%e0%a4%95/ https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/new-10kg-lpg-cylinder-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9a-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-10-%e0%a4%95/#respond Wed, 15 Jul 2026 04:22:00 +0000 https://news.newspaperhost.com/2026/07/15/new-10kg-lpg-cylinder-%e0%a4%9c%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a6-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%9a-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-10-%e0%a4%95/ new-10kg-lpg-cylinder:-जल्द-लॉन्च-हो-सकता-है-10-किलो-का-नया-गैस-सिलेंडर,-जानिए-संभावित-कीमत

नई दिल्‍ली सरकारी तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियां (OMCs) मार्केट में नया एलपीजी सिलेंडर लाने पर विचार कर रही हैं. यह सिलेंडर 10 किलो का होगा और […]

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नई दिल्‍ली
सरकारी तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूटर कंपनियां (OMCs) मार्केट में नया एलपीजी सिलेंडर लाने पर विचार कर रही हैं. यह सिलेंडर 10 किलो का होगा और इसको घरों तक पहुंचाने का प्रस्‍ताव है और अगर मंजूरी मिल जाती है, तो इन सिलेंडर को कमर्शियल एलपीजी की कीमत पर बेचा जाएगा। 

हालांकि, मार्केट में उच्च घनत्व पॉलीइथिलीन (HDPI) कंपोजिट टेक से बने छोटे सिलेंडर पहले से ही घरेलू ग्राहकों के लिए अलग-अलग ब्रांड नामों के तहत उपलब्ध हैं, जिनमें HPCL का HP गैस ओजस, इंडियनऑयल का इंडेन एक्स्ट्रालाइट और बीपीसीएल का भारतगैस लाइट शामिल हैं। 

10kg वाला सिलेंडर किसके लिए फायदेमंद 
एक तेल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि 10 किलोग्राम का कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडर से लगभग 50% हल्का है, जिससे इसे ले जाना, ट्रांसपोर्ट करना और संभालना आसान हो जाता है. स्टील सिलेंडरों के विपरीत, इन्हें ऊपरी मंजिलों तक ले जाना आसान है और इसके पारदर्शी कवर से उपभोक्ता बिना गेज के गैस का स्तर देख सकते हैं, जिससे रिफिल की योजना बनाना आसान हो जाता है।  

ओएमसी मौजूदा समय में कमर्शियल यूजर्स और घरेलू एलपीजी कनेक्शन के बिना यूजर्स के लिए 19 किलोग्राम, 5 किलोग्राम और 2 किलोग्राम के सिलेंडर बाजार में उपलब्ध कराती हैं. कमर्शियल LPG की कीमत घरेलू खाना पकाने की गैस से लगभग 133% अधिक है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2,930 रुपये है. 5 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 808.5 रुपये है। 

टारगेट ग्रुप और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन 
अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित विस्तार से प्रवासी कामगारों, किरायेदारों, छात्रों, स्ट्रीट वेंडरों, कैफे और फूड स्टॉलों को लाभ होगा, जिन्हें एलपीजी की आवश्यकता तो है लेकिन 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडरों के लिए जगह की कमी है. सूत्रों ने आगे बताया कि बेहतर पहुंच के लिए मौजूदा गैस एजेंसियों और चुनिंदा खुदरा दुकानों के माध्यम से अलग-अलग सिलेंडर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 

अभी वैल्‍यूएशन कर रहीं कंपनियां 
उद्योग विश्लेषकों का कहना है कि 10 किलोग्राम के सिलेंडरों को कमर्शियल प्राइस पर बेचने से कीमतें मौजूदा व्यावसायिक पेशकशों के अनुरूप हो जाएंगी, लेकिन इससे कम आय वाले यूजर्स के लिए सामर्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ सकती हैं. एक ऊर्जा विश्लेषक ने कहा कि प्राइस तय और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन ही यह तय करेंगे कि क्या यह शहरी कमजोर उपभोक्ताओं के लिए एक व्यावहारिक समाधान साबित होगा. ओएमसी ने कोई निश्चित समयसीमा बताने से इनकार कर दिया. ओएमसी ने कहा कि आखिरी फैसला लेने से पहले हम मांग, सुरक्षा संबंधी मंजूरी और रसद का वैल्‍यूएशन कर रहे हैं। 

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